Homeआरा भोजपुरबिहियाबिहिया मुख्य पार्षद के गिरफ्तारी की चर्चाएं जोरों पर

बिहिया मुख्य पार्षद के गिरफ्तारी की चर्चाएं जोरों पर

Bihiya Chairman: मुख्य पार्षद सचिन कुमार गुप्ता ने अपने विस्तृत फेसबुक लाइव संबोधन में उन सभी आरोपों का खंडन किया, जिनमें उन्हें फरार बताया जा रहा है।

  • हाइलाइट: Bihiya Chairman
    • सचिन गुप्ता ने जगदीशपुर के तत्कालीन डीएसपी राजीव चंद्र सिंह को बताया तानाशाह
    • कहा: उनसे हुए विवाद के चलते ही मुझे झूठे मुकदमों में फंसाने का कार्य किया गया

आरा, बिहार। भोजपुर जिले के बिहिया नगर पंचायत में इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में मुख्य पार्षद सचिन कुमार गुप्ता के एक फेसबुक लाइव ने हलचल मचा दी है। इस लाइव संबोधन में श्री गुप्ता ने न केवल अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है, बल्कि स्वयं को निर्दोष बताते हुए, अपनी अनुपस्थिति का कारण जगदीशपुर के तत्कालीन डीएसपी राजीव चंद्र सिंह से पुरानी अदावत को बताया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पुलिस द्वारा उनके आवास पर नोटिस चिपकाए जाने के बाद से उनकी गिरफ्तारी की चर्चाएं जोरों पर है, और अब इस पर श्री गुप्ता ने खुलकर अपनी बात रखी है।

मुख्य पार्षद सचिन कुमार गुप्ता ने अपने विस्तृत फेसबुक लाइव संबोधन में उन सभी आरोपों का खंडन किया, जिनमें उन्हें फरार बताया जा रहा है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वे लगातार नगरपालिका की बैठकों के लिए पत्र जारी करते रहे है और बैठक में हिस्सा लेते रहे हैं, जो इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि वे फरार नहीं हैं। श्री गुप्ता ने उस विशेष मामले का भी पूरा विवरण दिया, जिसके तहत उन्हें आरोपी बनाया गया है, और दावा किया कि यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहिया से उनकी अनुपस्थिति का मुख्य कारण जगदीशपुर के तत्कालीन डीएसपी राजीव चंद्र सिंह के साथ उनका पूर्व विवाद था, जिसके चलते उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने का कार्य किया गया। उनके अनुसार, उन्हें इस विवाद के चलते ही निशाना बनाया गया है।

हालांकि, मुख्य पार्षद के इन दावों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर गहन विचार-विमर्श और जांच आवश्यक है। यदि सचिन कुमार गुप्ता वास्तव में वांछित थे जिसमें उन्हें फरार बताया जा रहा है और पुलिस उनकी तलाश कर रही है, तो यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि वे निरंतर नगरपालिका की बैठकों में कैसे शामिल होते रहे? क्या बिहिया नगर पंचायत की बैठक गुप्त तरीके से आयोजित होती रही। क्या यह स्थिति नगर पंचायत के प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाती कि एक कथित ‘फरार’ व्यक्ति कैसे बैठकों में हिस्सा ले रहा था?

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि नगरपालिका पदाधिकारी द्वारा इस गंभीर स्थिति में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किस प्रकार किया गया? यदि उन्हें यह जानकारी थी कि उनके निकाय का मुख्य पार्षद पुलिस द्वारा वांछित है, तो क्या उन्होंने जानबूझकर इस तथ्य को स्थानीय थाना से छुपाया? क्या इस जानकारी को पुलिस के साथ साझा न करना, अपने पद का दुरुपयोग या कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही की श्रेणी में नहीं आता? यदि पुलिस उन्हें खोज रही थी और वे नगरपालिका की बैठकों में उपस्थित हो रहे थे, तो यह नपं प्रशासन की मिलीभगत या घोर लापरवाही का संकेत हो सकता है, जिसकी विस्तृत जांच आवश्यक है। क्या नगरपालिका के उन पदाधिकारियों पर भी इस स्थिति के लिए जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए, जिन्होंने इस जानकारी को संबंधित विभाग, राज्य निर्वाचन आयोग और प्राधिकारियों तक नहीं पहुँचाया?

इधर, अपने फेसबुक संदेश में सचिन गुप्ता ने बिहिया की आम जनता के लिए भी एक भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि किस तरीके से एक ‘तानाशाह डीएसपी’ द्वारा बिहिया के ‘प्रथम नागरिक’ को झूठे मुकदमों में फंसाने का काम किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में पुलिस ‘लीपापोथी’ करने में जुटी हुई है, जिससे सच्चाई को छिपाया जा सके और उन्हें न्याय से वंचित किया जा सके।

बिहिया नगर पंचायत के मुख्य पार्षद सचिन कुमार गुप्ता के बयानों ने एक जटिल स्थिति उत्पन्न कर दी है, जिसमें कई पक्षों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। एक ओर जहां मुख्य पार्षद स्वयं को निर्दोष बताकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ‘फरार’ स्थिति में बैठकों में उपस्थिति और नगरपालिका पदाधिकारियों की कथित चुप्पी, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रही है।

Khabar Apki
Khabar Apki
Khabar Apki News Covers all Breaking News in Hindi

Most Popular