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SEC Bihar Court – पंचायती व नगरपालिका के 11 मामलों की हुई सुनवाई

SEC Bihar Court: सुनवाई का पहला मामला भोजपुर जिले के शाहपुर नगर पंचायत के चेयरमैन से संबंधित था। उन पर बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (I) (k) और धारा 18(I)(L) के उल्लंघन का आरोप है।

  • हाइलाइट: SEC Bihar Court
    • पश्चिमी चंपारण जिले से चार मामले :
    • सारण जिले से दो मामलों की सुनवाई:

पटना: राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) SEC Bihar Court में 23 दिसंबर, मंगलवार को कुल 11 महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई हुई, जो राज्य में पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं में चुनावी शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में आयोग के दृढ़ संकल्प को दर्शाते हैं। ये मामले विभिन्न जिलों से संबंधित थे और इनमें चुनावी नियमों के गंभीर उल्लंघनों के आरोप शामिल थे।

सुनवाई का एक प्रमुख मामला भोजपुर जिले के शाहपुर नगर पंचायत के चेयरमैन से संबंधित था। उन पर बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (I) (k) और धारा 18(I)(L) के उल्लंघन का आरोप था। दरभंगा जिले से संबंधित एक अन्य मामले में, एक मुखिया के 21 वर्ष से कम उम्र में निर्वाचित होने का आरोप था, जो चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु मानदंड का उल्लंघन है। वही किशनगंज जिले के दो मामलों की सुनवाई हुई। ये दोनों मामले तथ्य छुपाकर चुनाव लड़ने और आरक्षण का अनुचित लाभ लेने से संबंधित थे।

SEC Bihar Court – पश्चिमी चंपारण जिले से चार मामले

  1. पहला मामला एक निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा अधिक लाभ के लिए भ्रष्ट आचरण में लिप्त रहने से संबंधित था, जो पद के दुरुपयोग और अनैतिक व्यवहार को इंगित करता है।
  2. दूसरा मामला वार्ड नंबर-24 के एक वार्ड पार्षद से संबंधित था, जिनके 04/04/2008 की कट-ऑफ तारीख के बाद दो से ज़्यादा बच्चे होने का आरोप था, जो बिहार में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों का उल्लंघन है।
  3. तीसरा मामला वार्ड पार्षद द्वारा अपने करीबी रिश्तेदारों को रोज़ाना दिहाड़ी पर सफ़ाई कर्मचारी के तौर पर नौकरी देने से संबंधित था, जिससे भाई-भतीजावाद और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग के आरोप लगे है।
  4. चौथा मामला वार्ड नंबर-07 के वार्ड पार्षद मनोज कुमार द्वारा अपने नामांकन फॉर्म में गलत जानकारी देने के संबंध में था, जो चुनावी हलफनामों में पारदर्शिता और सत्यता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

गलत जाति प्रमाण पत्र: पटना नगरपालिका चुनाव से संबंधित एक मामले में गलत जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का आरोप था। यह मामला चुनावी लाभ के लिए जाली दस्तावेजों के उपयोग की गंभीर समस्या को दर्शाता है और जाति प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता की जांच के महत्व पर बल देता है।

सारण जिले से दो मामलों की सुनवाई:

  1. पहला मामला तथ्य छुपाकर पंचायत समिति सदस्य के पद पर निर्वाचित होने से संबंधित था।
  2. दूसरा मामला आपराधिक मुकदमे से संबंधित तथ्यों को छुपाकर जिला परिषद सदस्य पद पर निर्वाचित होने के संबंध में था।

इन सभी 11 मामलों की सुनवाई राज्य निर्वाचन आयोग बिहार द्वारा निष्पक्ष और विस्तृत जांच के साथ की जा रही है। इन कार्यवाहियों का उद्देश्य बिहार में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और विश्वसनीयता को बनाए रखना भी है। आयोग की यह कार्रवाई चुनावी नियमों के उल्लंघन के प्रति उसकी शून्य-सहिष्णुता की नीति को प्रदर्शित करती है और भविष्य के उम्मीदवारों के लिए एक स्पष्ट संदेश देती है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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