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भोजपुर में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक, डीएम ने दिए सख्त निर्देश

Private schools: भोजपुर जिला पदाधिकारी तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई समीक्षात्मक बैठक में जिले के निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों, जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विभिन्न स्कूल संघों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

  • हाइलाइट: Private schools
  • विभिन्न शुल्कों, जैसे नामांकन, री-एडमिशन, ड्रेस, पुस्तक, विकास शुल्क एवं अन्य वार्षिक मदों की हुई समीक्षा
  • निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षात्मक बैठक में जिला पदाधिकारी तनय सुल्तानिया ने दिए निर्देश

आरा, भोजपुर। जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और निजी विद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शनिवार को समाहरणालय के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ एक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में जिले के निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों, जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विभिन्न स्कूल संघों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक का मुख्य केंद्र निजी विद्यालयों द्वारा छात्रों से लिए जाने वाले विभिन्न शुल्कों, जैसे नामांकन, री-एडमिशन, ड्रेस, पुस्तक, विकास शुल्क एवं अन्य वार्षिक मदों के संबंध में अभिभावकों से प्राप्त शिकायतें रही। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता सर्वोपरि है और अभिभावकों को शुल्क संरचना के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

Private schools: बैठक में जिला पदाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश:

शुल्क का सार्वजनिक प्रदर्शन: जिला पदाधिकारी ने सभी निजी विद्यालयों को निर्देशित किया कि वे पिछले वर्ष और वर्तमान वर्ष के लिए निर्धारित प्रवेश शुल्क, री-एडमिशन शुल्क और अन्य सभी मदों का विवरण अपने विद्यालय के आधिकारिक सूचना पट्ट और वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। इससे आम जनता और अभिभावकों को शुल्कों के प्रति स्पष्टता मिलेगी।

शुल्क वृद्धि पर नियंत्रण: निर्देशानुसार, विद्यालय अपनी आवश्यकता के अनुरूप वार्षिक शुल्क में अधिकतम 7 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकते हैं, बशर्ते इसका पर्याप्त औचित्य वेबसाइट पर अंकित हो। यदि कोई विद्यालय 7 प्रतिशत से अधिक शुल्क वृद्धि करना चाहता है, तो इसके लिए प्रमंडल स्तर पर गठित शुल्क विनियमन समिति से विधिवत अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

पुस्तकों और ड्रेस की खरीद में स्वतंत्रता: अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या प्रतिष्ठान से ड्रेस और पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करना नियमों के विरुद्ध है। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यालय अपनी पुस्तकों और ड्रेस की सूची विशिष्टताओं (Specifications) के साथ सार्वजनिक करें, ताकि अभिभावक अपनी सुविधानुसार बाजार में कहीं से भी उनकी खरीदारी कर सकें।

मानकों का अनुपालन और जांच: बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बिना सरकारी स्वीकृति के कोई भी विद्यालय संचालित नहीं किया जा सकता है। भविष्य में किसी भी विद्यालय के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर गहन जांच की जाएगी। शिक्षा विभाग को बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) विधेयक, 2019 के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

इस समीक्षा बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, भोजपुर, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा), जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) के साथ-साथ सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन तथा प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष, सचिव और प्रमुख विद्यालयों के संचालक भी बैठक में सम्मिलित हुए।

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