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निराधार आरोपों से वे विचलित होने वाले नहीं हैं: राकेश ओझा

Rakesh Ojha Live: शाहपुर विधायक राकेश ओझा ने पूर्व विधायक राहुल तिवारी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उनके समय में विकास कार्यों में कमीशन खोरी का खेल चलता था।

  • हाइलाइट: Rakesh Ojha Live
  • विधायक राकेश ओझा ने पूर्व विधायक के आरोपों पर स्पष्ट की स्थिति
  • कहा: वे शाहपुर क्षेत्र के विकास और पारदर्शिता के प्रति कटिबद्ध है
  • पूर्व विधायक राहुल तिवारी के सह पर ठेकेदार धांधली को दे रहे अंजाम

आरा,भोजपुर। जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक राकेश ओझा ने अपने सोशल साइट के माध्यम से अपने क्षेत्र की जनता से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपनी माताजी के स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों, क्षेत्र में अगलगी से फसल नुकसान और विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त नीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भले ही माताजी के स्वास्थ्य उपचार के चलते कुछ समय से क्षेत्र से बाहर है, लेकिन शाहपुर की जनता की समस्याएं उनके लिए सदैव सर्वोपरि रही हैं।

विधायक ने कहा कि पिछले कुछ समय में शाहपुर क्षेत्र में कई ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिन्होंने उन्हें अत्यंत दुखी किया है। इन घटनाओं को संज्ञान में आते ही उन्होंने कृषि मंत्री से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिले ताकि उनकी क्षति की भरपाई कुछ हद तक की जा सके।

Rakesh Ojha Live: शाहपुर के पूर्व विधायक पर तीखा हमला

इसके अतिरिक्त, राकेश ओझा ने शाहपुर के पूर्व विधायक पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक और उनके समर्थक क्षेत्र में जंगलराज की मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं और अपराधियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं। विधायक ओझा ने शाहपुर प्रखंड के ईश्वरपुरा पंचायत में चल रहे पुल निर्माण कार्य में व्याप्त अनियमितताओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

विधायक ने इस कार्य में व्यापक धांधली की आशंका जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण सामग्री, विशेषकर सीमेंट और छड़ की गुणवत्ता अत्यंत घटिया है। उन्होंने कहा कि सिविल इंजीनियरिंग के मानकों की अनदेखी की जा रही है और पिलर ढलाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जो तकनीकी सावधानी बरतनी चाहिए, उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। जनता से प्राप्त शिकायतों के आधार पर उन्होंने इस मामले को अत्यंत गंभीर बताया है।

सामग्री की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की

उन्होंने बताया कि आठ महीनों से बंद पड़े इस पुल निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की है। सरिया में जंग लग जाना और सीमेंट की गुणवत्ता, मानकों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में किसी भी स्तर पर धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस संदर्भ में संबंधित विभाग के एसडीओ, कार्यपालक अभियंता, जिलाधिकारी से लेकर मुख्य सचिव तक को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

सबसे पहले, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरा कार्य करने का तरीका बिल्कुल पारदर्शी है। मैंने कभी भी किसी ठेकेदार से न तो निजी तौर पर मुलाकात की है और न ही कभी फोन पर कोई संपर्क किया है। मेरी संवाद प्रक्रिया हमेशा विभागीय अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ रहती है। चाहे सरना का मामला हो, बनाही रोड हो या धमवल रोड का प्रोजेक्ट, जब भी कहीं तकनीकी या लोकेशन संबंधी समस्या आई, मैंने संबंधित विभाग के इंजीनियरों और डीएम के साथ बात करके समाधान निकाला है। मेरा उद्देश्य हमेशा यह रहा है कि विकास कार्यों से ग्रामीणों को कोई असुविधा न हो और काम सरकारी मानकों के अनुरूप संपन्न हो।

सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए उसे पटना भेजा गया है

शाहपुर में चल रहे वर्तमान पुल निर्माण कार्य में जो अनियमितताएं सामने आई हैं, वह अत्यंत चिंताजनक हैं। जब विभाग के एसडीओ ने स्वयं स्वीकार किया है कि सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए उसे पटना भेजा गया है, तो ऐसे में निर्माण कार्य जारी रखना घोर लापरवाही का संकेत है। इस पूरे प्रोजेक्ट में कमीशनखोरी और धांधली की बू साफ आ रही है। यह सर्वविदित है कि पूर्व विधायक के संरक्षण में कैसे कुछ लोग ‘वसूली एजेंट’ के रूप में काम करते थे और अन्य योग्य ठेकेदारों को डरा-धमकाकर क्षेत्र से बाहर कर दिया गया था।

टेंडर प्रक्रिया में जो खेल हुआ है, वह भी जांच का विषय है। एक सोची-समझी रणनीति के तहत आठ-नौ आवेदकों में से सात को अयोग्य घोषित कर दिया गया और केवल एक ठेकेदार और उसके डमी उम्मीदवार को पात्र माना गया। इतना ही नहीं, जिस एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट के आधार पर यह टेंडर हासिल किया गया है, वह भी संदेह के घेरे में है। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं इस पूरी टेंडर प्रक्रिया और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट की उच्च स्तरीय जांच करवाऊंगा।

मेरे लिए राजनीति का अर्थ जनसेवा है, कमीशनखोरी नहीं: राकेश ओझा

मेरे लिए राजनीति का अर्थ जनसेवा है, कमीशनखोरी नहीं। पूर्व विधायक पर निशाना साधते हुए विधायक राकेश ओझा ने कहा कि जो लोग पहले कमीशन के बदले ठेकेदारों के भ्रष्टाचार को संरक्षण देते रहे, वे आज विकास के नाम पर जनता को भ्रमित नहीं कर सकते। उस समय जब जवइनिया गांव के ठोकर बांध भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए, तब भी उन्होंने अपनी जवाबदेही तय नहीं की। आज जब सरकार पर्याप्त बजट आवंटित कर रही है, तो काम की गुणवत्ता से समझौता करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।

मैं शाहपुर की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि मेरी प्राथमिकता केवल और केवल क्षेत्र का सर्वांगीण विकास है। मैं किसी भी ठेकेदार का दबाव या प्रलोभन स्वीकार नहीं करने वाला। जो भी कार्य होगा, वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही होगा। अगर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मुझे किसी के विरोध का सामना करना पड़ता है, तो मैं इसके लिए तैयार हूं। मेरा काम प्रशासन के माध्यम से सिस्टम को दुरुस्त करना है और मैं अपने इस संकल्प पर अडिग हूं कि शाहपुर में भ्रष्टाचार मुक्त और उच्च स्तरीय विकास कार्य ही मेरी पहली और आखिरी पहचान होगी। उन पर लग रहे निराधार आरोपों और उन्हें बदनाम करने की साजिशों से वे विचलित होने वाले नहीं हैं।

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