Double Murder Madai: जमीन के महज डेढ़ फिट टुकड़े को लेकर उपजा विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया और दो परिवारों के चिराग बुझा दिए।
- हाइलाइट: Double Murder Madai
- जमीन के महज डेढ़ फिट टुकड़े को लेकर उपजा विवाद
- इस खूनी झड़प ने दो परिवारों से उनकी खुशियां भी छीन लीं
23 मई, आरा,बिहार। भोजपुर जिले के चरपोखरी थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले मदई गांव में शुक्रवार की देर शाम जो कुछ हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जमीन के महज डेढ़ फिट टुकड़े को लेकर उपजा विवाद कब हिंसक संघर्ष में बदल गया, इसका अंदाजा शायद किसी को नहीं था। इस दुखद घटना ने न केवल दो परिवारों के चिराग बुझा दिए, बल्कि स्थानीय अंचल प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर भी कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
Double Murder Madai : डेढ़ फिट भूमि का मामूली विवाद बना काल का ग्रास
घटना की शुरुआत एक सामान्य भूमि विवाद के साथ हुई, जो समय के साथ गहराता गया। शुक्रवार शाम को जब यह विवाद अपने चरम पर था, तो दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते बहसबाजी ने हिंसक रूप ले लिया और लाठी-डंडों से लैस दोनों गुट एक-दूसरे पर टूट पड़े। इस खूनी झड़प ने न केवल खून बहाया, बल्कि दो परिवारों से उनकी खुशियां भी छीन लीं।
इस संघर्ष में एक पक्ष के राजनाथ सिंह (55 वर्ष) की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं, दूसरे पक्ष के राधेश्याम प्रसाद (32 वर्ष) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। राधेश्याम, जो एक निजी कंपनी में कार्यरत थे और अपनी आजीविका के लिए बाहर रहते थे, के असमय निधन ने उनके परिवार को गहरा सदमा दिया है। इस घटना में महिलाओं सहित आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज आरा के अस्पताल में चल रहा है।
पुलिस की संवेदनशीलता पर उठे सवाल
इस पूरी घटना का सबसे दुखद और हैरान करने वाला पहलू अस्पताल परिसर में हुई दोबारा झड़प है। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटनास्थल पर पुलिस पहुंची जरूर, लेकिन स्थिति की गंभीरता को भांपने और एहतियाती कदम उठाने में पूरी तरह विफल रही। पुलिस ने दोनों पक्षों को बिना किसी सुरक्षा घेरे के इलाज के लिए अस्पताल जाने की सलाह दे दी। यह प्रशासनिक चूक साबित हुई। अस्पताल परिसर में पहुंचते ही दोनों गुट फिर से भिड़ गए, जिसके परिणामस्वरूप अराजकता और भी बढ़ गई।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि यदि पुलिस ने उस समय संवेदनशीलता दिखाई होती और दोनों पक्षों को अलग-अलग सुरक्षा के साथ अस्पताल भेजा होता, तो राधेश्याम की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस की इस कार्यप्रणाली ने सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है।
जांच और तकनीकी पहलुओं का सच
इस मामले में अब सीसीटीवी फुटेज पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अस्पताल परिसर के सीसीटीवी कैमरों की खराब स्थिति ने जांच की राह में भी बाधाएं उत्पन्न कर दी हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अस्पताल में हुई हिंसक झड़प की कोई फुटेज उपलब्ध है या नहीं। यदि कैमरे खराब थे, तो यह अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा चूक का एक और बड़ा उदाहरण है।
क्या टाली जा सकती थी यह त्रासदी?
ग्रामीणों की माने तो यह अंचल प्रशासन की उस निष्क्रियता का आईना है, जिसमें भूमि विवादों को नजरअंदाज किया जाता है। यदि राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने समय रहते जमीन विवाद की सुनवाई कर उसे सुलझाया होता, तो शायद यह नौबत ही नहीं आती। ग्रामीण आज भी इस बात से आक्रोशित हैं कि प्रशासन की उदासीनता के कारण दो हंसते-खेलते परिवार बर्बाद हो गए।

