HomeNewsबिहारउपेंद्र कुशवाहा और मांझी पर सवाल, क्या बोले बीजेपी नेता?

उपेंद्र कुशवाहा और मांझी पर सवाल, क्या बोले बीजेपी नेता?

BJP leader Hukumdev Narayan Yadav: राजनीति में शुचिता का दावा करने वाले हर दल के लिए हुकुमदेव नारायण यादव के ये शब्द एक सीख की तरह हैं कि सिद्धांत और व्यवहार में अंतर होना न केवल नुकसानदायक है, बल्कि यह जनता के विश्वास को भी कम करता है।

RN Yadav
  • हाइलाइट: BJP leader Hukumdev Narayan Yadav
  • हुकुमदेव नारायण यादव के बेबाक बोल:
  • परिवारवाद और दोहरे मानदंडों पर सवाल
  • कहा: राजनीति में ‘दृष्टि भेद’ का यह खेल
  • डाकू हमारे पक्ष में है तो पवित्र हो गया?

पटना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और अपने अनूठे अंदाज के लिए प्रसिद्ध हुकुमदेव नारायण यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी बेबाक बयानी और तार्किक शैली के लिए पहचाने जाने वाले हुकुमदेव ने इस बार अपनी ही पार्टी और गठबंधन के साथियों की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे राजनीति में वंशवाद और नैतिकता के पैमाने पर बेहद तीखी टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं।

BJP leader Hukumdev : डाकू हमारे पक्ष में है तो पवित्र हो गया?

विपक्ष के अक्सर उठाए जाने वाले ‘वाशिंग मशीन’ वाले आरोपों को हुकुमदेव नारायण यादव ने एक नए नजरिए से पेश किया है। उनका तर्क है कि राजनीति में ‘दृष्टि भेद’ का खेल चल रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति विपक्ष में है तो वह डाकू है, लेकिन वही व्यक्ति जब हमारे पक्ष में आता है तो वह पवित्र कैसे हो जाता है? यह विरोधाभास न केवल जनता में भ्रम पैदा करता है, बल्कि राजनीति के नैतिक धरातल को भी कमजोर करता है।

चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे तेज प्रातप व तेजस्वी यादव

हुकुमदेव नारायण यादव ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे किसी भी दल के प्रति नरमी नहीं बरत रहे हैं, बल्कि वे राजनीतिक शुचिता की बात कर रहे हैं। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के बेटों, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि वे कम से कम जनता के बीच से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके विपरीत, उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा, जितनराम मांझी और चिराग पासवान जैसे नेताओं के राजनीतिक कद और उनके परिवार के सदस्यों को मिली भूमिकाओं पर सीधा सवाल दागा है।

Tiyar Pax

बिना किसी जनादेश या निर्वाचित पद के, व्यक्ति को सत्ता में भागीदारी

विशेष रूप से उपेंद्र कुशवाहा के संदर्भ में उन्होंने तीखी टिप्पणी की है। हुकुमदेव ने सवाल उठाया कि एक ओर जहां परिवारवाद का विरोध किया जाता है, वहीं दूसरी ओर बिना किसी जनादेश या निर्वाचित पद के, व्यक्ति को सत्ता में भागीदारी दी जा रही है। उनका यह बयान बीजेपी के उन दावों को आईना दिखाने का काम कर रहा है, जिनमें पार्टी खुद को परिवारवाद से मुक्त बताती है।

पुराने नेताओं का इस प्रकार से मुखर होना

मौजूदा राजनीतिक परिवेश में, जहां बीजेपी नितिन नवीन के नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव और संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है, हुकुमदेव नारायण यादव का यह रुख पार्टी के भीतर बेचैनी पैदा कर सकता है। सियासी जानकारों का मानना है कि पुराने नेताओं का इस प्रकार से मुखर होना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर वैचारिक स्पष्टता को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ सकती है।

क्या हुकुमदेव नारायण यादव का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत राय है या इसके पीछे पार्टी के पुराने वफादारों की दबी हुई नाराजगी है, यह आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन एक बात तो तय है कि इस बेबाक बयान ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर उनके इस वीडियो को मिल रही प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि जनता भी राजनीति में दोहरे मानदंडों और स्पष्ट पैमाने की अपेक्षा रखती है।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
- Advertisment -
sambhavna

Most Popular