Khanqah Mirganj Ara आरा। भोजपुर जिले के आरा शहर के मीरगंज स्थित रूहानी व मरकजी खानकाह फरिदीया में सुल्तानुल मशाऐख हाफिज शाह मोहम्मद फरीदउद्दीन आरवी रहमतुल्लाह अलैह का 124वां दो दिवसीय सालाना उर्स का आयोजन पीरे तरीकत अलहाज अब्दुस सलाम साहब की सरपरस्ती में अगामी 11 और 12 जुलाई को आयोजित होगा।
अगामी 11 जुलाई (शनिवार) को नमाज असर के बाद परचम कुशाई का कार्यक्रम होगा। मगरिब की नमाज के बाद महफिल-मिलाद-ए- पाक का कार्यक्रम होगा। इशा की नमाज के बाद हिन्दुस्तान के कोने-कोने से आए विद्वान ओलमाओं के द्वारा तकरीर होगा। तत्पश्चात सुल्तानुल मशायख के आस्ताने (मजार) पर चादरपोशी होगी। इसके बाद लंगरखानी का आयोजन होगा।
12 जुलाई (रविवार) 26 की सुबह 6 बजे भलुहीपुर स्थित शाह मसलाउद्दीन रहमतुल्लाह अलैह एवं मोईन बाबू शाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर चादरपोशी होगी। सुबह 8 बजे खानकाह फरीदीया मीरगंज में कुरानखानी होगी। उसके बाद कुल और फातेहा का कार्यक्रम होगा।
Khanqah Mirganj Ara : उर्स के दूसरे दिन फातेहा के बाद लंगरखानी का आयोजन
खानकाह कमिटी ने कहा कि उर्स के दूसरे दिन फातेहा के बाद लंगरखानी का आयोजन किया जाएगा। इस मौके खानकाह के सदर मौलाना अब्दुस सलाम फरीदी ने बताया कि दीन की तबलीग के लिए आरा शहर में सुल्तानुल मशायक ने खानकाह फरीदिया की बुनियाद अपने हाथों रखी थी। आज की तारीख में उनके अकीदतमंदो कि तादाद लाखों में है, जो शहर आरा के अलावे उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल एवं मुल्क के कोने-कोने में फैले हुए हैं।
सुल्तानुल मशायक हाफिज शाह मोहम्मद फरीदुद्दीन आरवी रहमतुल्लाह अलैह की पूरी जिंदगी अल्लाह की इबादत के अलावे लोगों की खिदमत में गुजरी, जो आज भी खानकाह में नजर आता है। खानकाह में इबादत के साथ-साथ इंसानों की खिदमत का सबक सिखाया जाता है, उन्होने कहा की खानकाह एक ऐसी जगह है। जहां सभी लोगों की मुरादें पूरी होती है।




