Bharat Tiwari video: भरत तिवारी का वह अंतिम फेसबुक लाइव वीडियो, जिसमें उन्हें हथियार फेंककर सरेंडर करते हुए देखा गया था, अब उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर उपलब्ध नहीं है।
- हाइलाइट: Bharat Tiwari video
- अब उस वीडियो का फेसबुक पेज से हट जाना कई तरह के संदेह पैदा करता है
- फेसबुक की नीतियों के कारण हटा या इसे किसी ने जानबूझकर डिलीट किया है?
- 17 जून का वीडियो, 15 जुलाई से पहले भरत तिवारी के फेसबुक पेज से डिलीट
- क्या यह तकनीकी चूक है या साक्ष्य मिटाने की कोई सोची-समझी साजिश?
आरा। भोजपुर के भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में एक नया मोड़ सामने आया है जिसने जनमानस की जिज्ञासाओं के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी का वह अंतिम फेसबुक लाइव वीडियो, जिसमें उन्हें हथियार फेंककर सरेंडर करते हुए देखा गया था, अब उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर उपलब्ध नहीं है। यह वीडियो इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा था, और इसके अचानक गायब होने से सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक अटकलों का बाजार गर्म है।
Bharat Tiwari video : मौत के अंतिम क्षणों से जुड़ी वीडियो को लोग काफी देख रहे थे
भरत तिवारी की मौत के बाद से उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल के प्रति लोगों की रुचि अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। एक ओर जहां उनके एनकाउंटर की न्यायिक जांच चल रही है और आयोग द्वारा गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स एक पहेली बनते जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिस फेसबुक पेज पर पहले महज कुछ हजार फॉलोअर्स थे, आज उनकी संख्या बढ़कर 2 लाख 71 हजार के पार पहुंच गई है। यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि आम जनता इस मामले को कितनी गहराई से देख रही है और वे उन कड़ियों को जोड़ना चाहते हैं जो उनकी मौत के अंतिम क्षणों से जुड़ी हैं।
घटना का उन्होंने लाइव प्रसारण किया था, जो जीवंत दस्तावेज था
स्थानीय निवासियों और उनके मित्रों के अनुसार, भरत तिवारी सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय थे। वे अपनी दिनचर्या, यात्राओं और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से राय रखने के लिए नियमित रूप से फेसबुक लाइव का सहारा लेते थे। भरत के लिए फेसबुक लाइव केवल एक माध्यम नहीं, बल्कि संवाद का एक जरिया था। वे अक्सर प्रशासन या स्थानीय समस्याओं को लेकर सीधे लाइव आकर अपनी बात रखते थे। इसी आदत के चलते, घटना वाले दिन भी उन्होंने लाइव प्रसारण किया था, जो उनके अंतिम समय का एक जीवंत दस्तावेज बन गया था।
वीडियो का फेसबुक पेज से हट जाना कई तरह के संदेह
ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी हमेशा अपने साथ मोबाइल रखते थे और हर घटनाक्रम का वीडियो बनाकर उसे सार्वजनिक करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। कथित एनकाउंटर के दिन का वह वीडियो, जिसमें उन्होंने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण किया था, वायरल होने के बाद से ही न्याय की मांग कर रहे लोगों के लिए सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा था। अब उस वीडियो का फेसबुक पेज से हट जाना कई तरह के संदेह पैदा करता है। क्या यह तकनीकी गड़बड़ी है, फेसबुक की नीतियों के कारण हटा या इसे किसी ने जानबूझकर डिलीट किया है, यह जांच का विषय है।
क्या यह तकनीकी चूक है या साक्ष्य मिटाने की कोई सोची-समझी साजिश
इस पूरे घटनाक्रम का एक और पहलू यह है कि भरत तिवारी की लोकप्रियता का लाभ उठाने के लिए उनके नाम से दर्जनों फर्जी फेसबुक पेज बना लिए गए हैं। उनके प्रशंसकों और समर्थकों द्वारा कई ऐसे पेज संचालित किए जा रहे हैं जो उनके पुराने वीडियो को साझा कर रहे हैं। पर उनके ही पेज से इस अंतिम डिजिटल साक्ष्य का गायब होना, क्या यह तकनीकी चूक है या साक्ष्य मिटाने की कोई सोची-समझी साजिश। तब तक, सोशल मीडिया पर बढ़ता यह जनसैलाब और उनके पेज पर उमड़ती भीड़ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि समाज का एक बड़ा वर्ग इस मामले में किसी भी तरह की लीपापोती को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

