Krishna Janmotsav Ara: 113वें कृष्ण जन्मोत्सव की पांचवीं निशा में तबला वादन, कथक और शास्त्रीय गायन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
- हाइलाइट: Krishna Janmotsav Ara
- कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह में सजी सुरों की महफिल
- संगीत समारोह में झारखंड के कलाकारों ने बांधा समां
- कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह में सजी सुरों की महफिल
आरा। बक्शी कुलदीप नारायण मेमोरियल कल्चरल सोसाइटी के बैनर तले आयोजित छह दिवसीय 113वें कृष्ण जन्मोत्सव संगीत समारोह की पांचवीं निशा में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन जमशेदपुर के चर्चित तबला वादक पंडित दयानाथ उपाध्याय ने किया।
इस अवसर पर पंडित दयानाथ उपाध्याय ने कहा कि आज समाज में शुद्ध सांगीतिक आयोजनों के समक्ष संकट का दौर है। अपसंस्कृति को भारतीय शास्त्रीय संगीत के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के सभी लोगों को आगे आने की आवश्यकता है।
Krishna Janmotsav Ara : झारखंड के कलाकारों ने बांधा समां
समारोह में झारखंड से आए तबला वादक श्रेष्ठ उपाध्याय ने स्वतंत्र तबला वादन की प्रस्तुति दी। उन्होंने कायदा, पेशकार और विभिन्न बंदिशों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, बक्सर के युवा कथक नर्तक शैलेंद्र सिंह और शालिनी महाराज ने घुंघरुओं की युगलबंदी से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
विदुषी बिमला देवी ने राग मेघ मल्हार में दानेदार तानों और बोल विस्तार के जरिए सुरों की अद्भुत छटा बिखेरी। छपरा की कथक नृत्यांगना कुमारी अनिशा ने लय, ताल और छंद पर आधारित प्रस्तुति देकर दर्शकों की सराहना प्राप्त की।
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. ट्विंकल केशरी और एम.एम. महिला कॉलेज की सहायक प्रोफेसर विणु कुमारी ने ‘रंगी साड़ी गुलाबी चुनरिया रे’ गीत पर राधा-कृष्ण के रास को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
नवोदित कलाकारों सिद्धि आनंद, सोमी सोनी और शानवी सोनी ने भी मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम का संचालन बक्शी विकास ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आदित्य श्रीवास्तव ने किया।

