Homeबिहारआराआरा के बहुचर्चित हत्याकांड के खौफनाक साजिश का एसपी ने किया खुलासा

आरा के बहुचर्चित हत्याकांड के खौफनाक साजिश का एसपी ने किया खुलासा

Ramkumar Singh Murder: भोजपुर पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने घटना से जुड़े तमाम अहम पहलुओं का खुलासा किया और पुलिस की अब तक की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा की।

Bijay singh
  • हाइलाइट: Ramkumar Singh Murder
  • आरा शहर के बहुचर्चित रामकुमार सिंह हत्याकांड
  • कनकपुरी, जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास हुई थी हत्या
  • इस हत्याकांड की मुख्य वजह सिंगही मौजा स्थित जमीन
  • पिछले 20 वर्षों से भूमि पर रामकुमार सिंह का वैध कब्जा

आरा। भोजपुर पुलिस ने आरा शहर के बहुचर्चित रामकुमार सिंह हत्याकांड का सफल उद्भेदन कर लिया है। इस सनसनीखेज मामले को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोजपुर पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने घटना से जुड़े तमाम अहम पहलुओं का खुलासा किया और पुलिस की अब तक की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा की।

घटना के विवरण को साझा करते हुए पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना 15 अक्टूबर 2026 की अहले सुबह लगभग 6:00 बजे कनकपुरी, जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास घटित हुई थी, जहां अज्ञात अपराधियों ने रामकुमार सिंह (Ramkumar Singh) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस दुस्साहसिक वारदात के तुरंत बाद स्थानीय थाने में मामला संख्या 784/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

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इस हाई प्रोफाइल मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी का नेतृत्व एसडीपीओ सदर वन द्वारा किया जा रहा था, जिसमें कई अन्य वरिष्ठ और अनुभवी पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। पुलिस ने परिवार द्वारा दी गई शिकायत और घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू की बारीकी से वैज्ञानिक और तकनीकी जांच शुरू की।

अनुसंधान के दौरान यह बात सामने आई कि इस हत्याकांड की मुख्य वजह एक पुराना जमीनी विवाद है। यह विवादित जमीन सिंगही मौजा में स्थित है, जिसका थाना नंबर 245, खसरा संख्या 69 और खाता संख्या 88 है। अब तक के पुलिस अनुसंधान में यह स्पष्ट हुआ है कि इस जमीन पर वर्ष 2006 से लगातार रामकुमार सिंह (Ramkumar Singh) का ही कब्जा चला आ रहा था। इतना ही नहीं, वर्ष 2020 में उनके द्वारा इस जमीन पर बाउंड्री वॉल का निर्माण भी कराया गया था।

Ramkumar Singh Murder: दाखिल-खारिज खूनी संघर्ष की मुख्य जड़ बना

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इसके विपरीत, विपक्षी पार्टी और इस मामले के आरोपियों ने वर्ष 2025 में इसी जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल कर ली और उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री अन्य लोगों के नाम करनी शुरू कर दी। यह बात पूरी तरह से स्पष्ट थी कि आरोपियों को यह ज्ञात था कि पिछले 20 वर्षों से इस भूमि पर रामकुमार सिंह का वैध कब्जा है, इसके बावजूद उन्होंने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज भी करवा लिया था, जो इस खूनी संघर्ष की मुख्य जड़ बना।

पुलिस अधीक्षक ने अपराधियों की गिरफ्तारी का ब्यौरा देते हुए बताया कि इस कांड में शामिल प्राथमिक अभियुक्त मनोज लकी को घटना के कुछ ही दिनों बाद भोजपुर जिले से ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके पश्चात, पिछले दो दिनों में की गई विशेष छापामारी के दौरान पुलिस ने तीन अन्य मुख्य अभियुक्तों—चंदन सिंह, अभिषेक सिंह और टिप्पु को धर दबोचा। इस प्रकार इस मामले में अब तक कुल चार अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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गिरफ्तारी की प्रक्रिया बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई। मनोज लकी की गिरफ्तारी भोजपुर से ही हुई, जबकि चंदन सिंह और अभिषेक सिंह को पुलिस ने कोलकाता एयरपोर्ट से उस समय दबोचा जब वे लगातार अपनी पहचान बदलकर भागने की फिराक में थे। वहीं, चौथे आरोपी टिप्पु की गिरफ्तारी बीती रात आरा शहर से ही सुनिश्चित की गई।

घटना से 15-20 दिन पूर्व ही रची गई थी खौफनाक साजिश

पुलिस की पूछताछ और तकनीकी सर्विलांस से यह भी खुलासा हुआ है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने पहले ही एक खौफनाक साजिश रची थी। घटना से 15-20 दिन पूर्व ही इन्होंने पूरी योजना तैयार कर ली थी कि हत्या कैसे की जाएगी, कौन शूटर गोली चलाएगा, घटना से पहले और बाद में उनका रूट क्या होगा और पुलिस से बचने के लिए उनकी हरकतें कैसी होंगी।

कानून की पकड़ से बचने के लिए इन शातिर अपराधियों ने अपनी हर चाल पहले से सोच रखी थी। घटना से तीन-चार दिन पहले ही इन्होंने अपने बैंक खातों से सारा पैसा निकाल लिया था और उसे अपनी पत्नी के खातों में ट्रांसफर कर दिया था। इसके साथ ही, इन्होंने अपनी पत्नी को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया था, नए सिम कार्ड खरीदे, नए मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और फर्जी खातों का निर्माण किया।

वारदात को अंजाम देने के बाद ये अपराधी आरा से फरार होकर पहले सिलीगुड़ी गए, वहां से गैंगटॉक पहुंचे और अंत में कोलकाता आए। इस पूरी यात्रा के दौरान वे लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदलते रहे ताकि पुलिस उनका सुराग न पा सके, लेकिन भोजपुर पुलिस के तकनीकी और खुफिया तंत्र के आगे उनकी एक न चली।

एक पिस्तौल भी बरामद

पुलिस अनुसंधान में यह भी सामने आया है कि चंदन सिंह और अन्य ने मिलकर इस पूरे अपराध की सुनियोजित रचना की थी, जबकि विवादित जमीन में मनोज लकी की भूमिका भी इस षड्यंत्र में संदिग्ध पाई गई है। पुलिस ने मुख्य आरोपी चंदन सिंह के घर से एक पिस्तौल भी बरामद की है और इस बात की गहनता से जांच की जा रही है कि क्या इसी हथियार का इस्तेमाल रामकुमार सिंह की हत्या में किया गया था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे कई गिरोह सक्रिय हैं जो फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों की जमीनों पर अवैध कब्जा जमाने का काम करते हैं। पुलिस अब ऐसे सभी मामलों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों की पुनरावृत्ति न हो सके।

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jay kumar
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