Homeशाहपुरसहजौलीदेवी ओझा की याद में बनेगा स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी

देवी ओझा की याद में बनेगा स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी

1857 warrior Devi Ojha: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा वीर देवी ओझा की स्मृतियों को सहेजने के लिए उनके पैतृक गांव सहजौली में स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी का शिलान्यास किया गया.

  • हाईलाइट:
  • स्मारिका का विमोचन और लाइब्रेरी का शिलान्यास

ARA:भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड अंतर्गत सहजौली गांव में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला को अपने साहस, रणनीति और अदम्य जुझारूपन से धार देने वाले महान योद्धा वीर देवी ओझा की स्मृतियों को सहेजने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक ठोस और संगठित पहल अब जमीन पर उतरती दिख रही है। गांव स्तर पर इतिहास और विरासत को संजोने की दिशा में यह एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को उनके पैतृक गांव सहजौली में ‘वीर देवी ओझा स्मृतिद्वार’ तथा ‘डिजिटल लाइब्रेरी’ के निर्माण कार्य का विधिवत शिलान्यास किया गया।

कार्यक्रम को विशेष बनाने के लिए वीर देवी ओझा के जीवन, उनके संघर्ष और देश के प्रति उनके योगदान पर केंद्रित एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इस स्मारिका में उनके व्यक्तित्व, घटनाक्रमों और 1857 के दौर की परिस्थितियों को समेटने का प्रयास किया गया है, ताकि आम जन—विशेषकर विद्यार्थी और युवा—इतिहास को केवल पाठ्यपुस्तक के सीमित संदर्भों में नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के जीवंत उदाहरणों के साथ समझ सकें।

1857 warrior Devi Ojha: अंग्रेजी हुकूमत के “छुड़ा दिए थे छक्के”

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पूर्व सांसद मीना सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वीर देवी ओझा जैसे महान क्रांतिकारी आज भी पूरे समाज के लिए बड़े प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और उनके जीवन का प्रत्येक अध्याय त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति की मिसाल है। मीना सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि 1857 के संघर्ष को अक्सर बड़े केंद्रों और प्रसिद्ध नामों तक सीमित करके देखा जाता है, जबकि बिहार और भोजपुर की धरती ने भी ऐसे अनेक सेनानी दिए जिनका योगदान किसी से कम नहीं रहा।

उन्होंने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत उन्हें पकड़ने के लिए लगातार प्रयास करती रही, परंतु उनके युद्ध कौशल और बेहतरीन रणनीति के कारण वह कभी सफल नहीं हो सकी। उनके अनुसार देवी ओझा की पकड़, उनकी गति, स्थानीय भूगोल का ज्ञान, तथा लोगों का समर्थन—इन सबने उन्हें एक मजबूत जन-आंदोलन के प्रतीक के रूप में खड़ा किया। मीना सिंह ने कहा कि इतिहास में वर्णन मिलता है कि महारानी विक्टोरिया तक ने उनके लिए “मौत से भी भयावह” सजा की घोषणा की थी।

पूर्व सांसद ने देवी ओझा मेमोरियल ट्रस्ट की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे वीर सपूत की स्मृतियों को सहेजने और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाने का कार्य केवल एक संस्था नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ट्रस्ट को बधाई देते हुए कहा कि स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण भविष्य में शोध, अध्ययन और प्रेरणा के केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

स्मारिका का विमोचन:

कार्यक्रम के दौरान स्मारिका का संयुक्त रूप से विमोचन किया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद मीना सिंह के साथ शिक्षाविद एम.के. मिश्रा, शंभू शरण मिश्रा, अधिवक्ता अश्विनी कुमार पांडे, नरेंद्र तिवारी तथा वीर देवी ओझा के वंशज देवकुमार ओझा मंच पर मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी सामग्री गांव-गांव तक पहुंचे, ताकि इतिहास जन-मानस में और अधिक मजबूती से स्थापित हो सके।

स्मारिका विमोचन के उपरांत अतिथियों, बुद्धिजीवियों और स्थानीय प्रतिनिधियों सहित कई वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय इतिहास पर आधारित सामग्री का संकलन, संरक्षण और प्रसार बेहद जरूरी है। क्योंकि समय के साथ मौखिक परंपराएं कमजोर पड़ती हैं और यदि उन्हें दस्तावेज के रूप में सुरक्षित न किया जाए तो आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण तथ्य खो सकते हैं।

स्मृतिद्वार एवं डिजिटल लाइब्रेरी का शिलान्यास

स्मारिका विमोचन के ठीक बाद स्मृतिद्वार एवं डिजिटल लाइब्रेरी निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि स्मृतिद्वार गांव के लिए एक प्रतीकात्मक प्रवेश-बिंदु की तरह होगा, जो आने-जाने वाले लोगों को हर बार याद दिलाएगा कि यह धरती किस वीरता की साक्षी रही है। वहीं डिजिटल लाइब्रेरी आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप एक ऐसा केंद्र बन सकती है जहां ऐतिहासिक सामग्री, दस्तावेज, तस्वीरें, लेख, वीडियो, शोध-पत्र और विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हो सके।

Shahpur MLA Rakesh Ranjan Ojha

स्थानीय विधायक राकेश रंजन ने कहा कि वीर देवी ओझा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में उनके साहस और संघर्ष ने अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ा दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे योद्धाओं की स्मृतियों को संस्थागत रूप देने से समाज में आत्मगौरव और प्रेरणा की भावना मजबूत होती है। विधायक ने ट्रस्ट और ग्रामीणों की सक्रियता को सराहते हुए कहा कि सहजौली की यह पहल आने वाले समय में आसपास के क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष दिलीप कुमार ओझा ने जानकारी दी कि अगले कुछ महीनों में वीर देवी ओझा के जीवन, संघर्ष और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर आधारित एक विस्तृत पुस्तक भी प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्मारिका जहां एक परिचयात्मक दस्तावेज है, वहीं प्रस्तावित पुस्तक अधिक विस्तृत शोध और संदर्भों के साथ तैयार की जाएगी, ताकि इतिहास के अध्येताओं और विद्यार्थियों को अधिक प्रामाणिक सामग्री मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल एक-दो कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत अभियान है जिसमें समाज की भागीदारी निरंतर जरूरी होगी।

नई पीढ़ी को योगदान से परिचित कराना समय की आवश्यकता

शिक्षाविद एम.के. मिश्रा ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि नई पीढ़ी को वीर देवी ओझा के योगदान से परिचित कराना समय की बड़ी आवश्यकता है। आज के दौर में जब युवाओं के सामने अनेक प्रकार के विकल्प, विचार और प्रभाव मौजूद हैं, तब अपने वास्तविक इतिहास और स्थानीय नायकों से परिचय उन्हें सही दिशा और मजबूत मूल्य दे सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी इस काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्योंकि यह बच्चों और युवाओं को तकनीक के माध्यम से इतिहास से जोड़ सकेगी।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों के साथ तालमेल बनाकर यहां शैक्षिक भ्रमण (एजुकेशनल विजिट), व्याख्यान, वाद-विवाद प्रतियोगिता और इतिहास आधारित कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। इससे स्मृतिद्वार और लाइब्रेरी केवल संरचना बनकर नहीं रहेंगे, बल्कि सक्रिय शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित होंगे।

समाज के लिए गौरव, स्मृति को जीवंत रखने की पहल

पूर्व विधायक राहुल तिवारी ने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करना पूरे समाज के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि जब किसी गांव या क्षेत्र की पहचान ऐसे नायकों से जुड़ती है तो वहां के लोगों में एक सकारात्मक आत्मविश्वास पैदा होता है, जो सामाजिक विकास के लिए भी प्रेरक साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन सेनानियों का नाम राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षाकृत कम चर्चित रहा, उन्हें सामने लाने का कार्य स्थानीय समाज को ही करना होता है—और सहजौली ने यही करके दिखाया है।

वहीं शंभू शरण मिश्रा, अधिवक्ता अश्विनी कुमार पांडे, नरेंद्र तिवारी और मुक्तेश्वर मिश्र उर्फ सरजी ने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर देवी ओझा का नाम सुनकर अंग्रेजी सेना भी भयभीत हो जाती थी। वक्ताओं के अनुसार उनकी रणनीति, निर्भीकता और संगठन क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। उन्होंने कहा कि सहजौली मठिया में उनके नाम पर स्मृतिद्वार एवं डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है। इससे न केवल सम्मान का भाव बनेगा, बल्कि शोध और जानकारी का एक ठिकाना भी तैयार होगा।

“यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है”

समाजसेवी हीरालाल ओझा ने कहा कि वीर देवी ओझा के संघर्ष और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि हजारों-लाखों बलिदानों की श्रृंखला है। यदि हम उन बलिदानों को भुला देंगे, तो हम अपने मूल्य, अपनी पहचान और अपने सामाजिक दायित्व से भी दूर होते जाएंगे। उनके मुताबिक स्मृतिद्वार और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी पहलें समाज को अपने अतीत से जोड़कर उसे भविष्य के लिए अधिक जागरूक और संगठित बनाती हैं।

कार्यक्रम में पैक्स अध्यक्ष कृष्णा यादव, चंचल ओझा, ऋषिकेश ओझा, उमेश चंद्र पांडे, विनय शंकर ओझा, शिवशंकर सिंह, सुरेमन चौधरी, शैलेश चंद्रा, एवं सत्यदेव राय ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने निर्माण कार्य को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने, सामग्री को व्यवस्थित तरीके से संग्रहित करने और लाइब्रेरी को नियमित रूप से संचालित रखने पर जोर दिया, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक प्रभावी बनी रहे।

अतिथियों का सम्मान और कार्यक्रम की गरिमा

कार्यक्रम से पूर्व देवी ओझा मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से सभी आगंतुक अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के प्रति आभार का प्रतीक था जो इस अभियान से किसी न किसी रूप में जुड़े हैं। आयोजन स्थल पर स्थानीय लोगों की भागीदारी और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। ग्रामीणों ने इसे अपने क्षेत्र के इतिहास के प्रति सम्मान और एकजुटता की अभिव्यक्ति के रूप में देखा।

इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में ट्रस्ट के सचिव अभिनव ओझा, रामदेव तिवारी, गोलू ओझा, रामकुमार यादव, अंकित पांडे, चन्दन पांडेय, पंकज तिवारी, पप्पू ओझा, अशोक शर्मा, शिवशंकर सिंह, बबली पांडेय, पत्रकार विकास पांडेय, मिथलेश कुमार सिन्हा उर्फ़ बुलेट, रवि यादव, कृष्णा उपाध्या, पिंटू कुशवाहा, बबलू सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।

Most Popular