- हाइलाइट्स: Appeal to PM Modi
- जवईनियां गांव के कटाव रोकने को लेकर विधायक ने पीएम को लिखा पत्र
- बिहार यूपी दोनों ओर से शीघ्र गंगा नदी में पिंचिंग बोल्डर करने का रखा है मांग
- पीएम को बताया कि इस दिशा में बिहार सरकार का प्रयास हो चुका है विफल
- जवईनियां का 100 से ज्यादा घर गंगा में समाहित हो जाने से बना है भय का माहौल
बिहार (भोजपुर)। शाहपुर विधायक राहुल तिवारी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के जवईनिया गांव को गंगा नदी के तेज कटाव से बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) दिल्ली, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और राष्ट्रीय आपदा कार्यालय को भी भेजा गया है। विधायक ने पत्र की एक प्रति प्रेस नोट के माध्यम से भी जारी की है।
विधायक राहुल तिवारी ने अपने पत्र में बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों की ओर से गंगा नदी में पिंचिंग बोल्डर का कार्य शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि इस दिशा में बिहार सरकार के प्रयास अब तक विफल रहे हैं। विधायक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जवईनिया गांव में 100 से अधिक घर, खेत और खलिहान गंगा नदी में समाहित हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
प्रेस नोट के माध्यम से जारी पत्र में विधायक ने उल्लेख किया है कि दामोदरपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले जवईनिया गांव में गंगा नदी के बांध के अंदर पानी में तेजी से कटाव हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस पंचायत की आबादी लगभग 10,000 है और इसमें अधिकांश आबादी दलित और पिछड़े समुदाय की है।
Appeal to PM Modi : पिंचिंग बोल्डर के माध्यम से कटाव रोकने का हो प्रयास
विधायक राहुल तिवारी ने जानकारी दी कि उन्होंने बिहार सरकार के संबंधित विभागों और माननीय मुख्यमंत्री को कई बार लिखित और मौखिक रूप से इस गंभीर समस्या से अवगत कराया है। संबंधित विभागों द्वारा आगे की कार्रवाई करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों तरफ से पिंचिंग बोल्डर के माध्यम से कटाव रोकने का प्रयास नहीं किया जाएगा, तब तक इस कटाव को रोक पाना संभव नहीं है।
अंत में, विधायक ने प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में शीघ्र ही कटाव को रोकने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की कार्रवाई की जाए, ताकि कटाव पीड़ित आबादी के गांव को बचाया जा सके।


