Martyr Danish: देश की सेवा करते शनिवार को शहीद हुए कायमनगर के 22 वर्षीय वायु सेना जवान दानिश आलम रविवार को राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक हो गये।
- हाइलाइट: Martyr Danish
- वायु सेना के जहाज से पहले बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा पार्थिव शरीर और फिर वाहन से लाया गया कायमनगर
- कोईलवर पुल से कायमनगर तक गूंजा-शहीद दानिश अमर रहें, जब तक सूरज-चांद रहेगा, दानिश तेरा नाम रहेगा
- फूलों से सजे सरकारी वाहन में कायमनगर पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर, अंतिम दर्शन को लोगों का उमड़ा हुजूम
आरा/कोइलवर। देश की सेवा करते शनिवार को शहीद हुए कायमनगर के 22 वर्षीय वायु सेना जवान दानिश आलम रविवार को राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक हो गये। इसके पहले उनका पार्थिव शरीर भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से बिहटा एयरफोर्स स्टेशन लाया गया। वहां वायुसेना अधिकारियों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद फूलों से सजे सरकारी वाहन से शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव कायमनगर लाया गया।
बिहटा से कोईलवर के बीच सड़क की दोनों ओर खड़े लोगों ने शहीद का अभिवादन किया। कोईलवर पुल पार करते ही सैकड़ों की संख्या में छोटी-बड़ी गाड़ियों का काफिला हाथों में तिरंगा लिए शहीद की अगुआई की। जैसे ही पार्थिव कोईलवर पुल से गुजरा, वहां बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने शहीद दानिश अमर रहें, भारत माता की जय, जब तक सूरज-चांद रहेगा, दानिश तेरा नाम रहेगा…जैसे गगनभेदी नारे लगाए। लोगों ने हाथ जोड़कर और पुष्पवर्षा कर अपने वीर सपूत को अंतिम श्रद्धांजलि दी। रास्ते में हर बाजार पर बड़ी संख्या में खड़े लोगों ने शहीद को नम आंखों से विदा किया। कायमनगर तक पहुंचने के दरम्यान पूरे रास्ते लोगों की आंखें नम रहीं। पूरे क्षेत्र में देशभक्ति का माहौल रहा।
Martyr Danish : अंतिम दर्शन को उमड़ा जन सैलाब
आंतरिक श्रद्धांजलि: शहीद के अंतिम दर्शन को उमड़ा सैलाब शहीद दानिश के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। गांव और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। जैसे ही वायुसेना के जवान तिरंगे में लिपटे शहीद दानिश के पार्थिव शरीर को कंधों पर लेकर संकरी गली से उनके घर की ओर बढ़े, पूरे इलाके में सन्नाटा छा गया। दूरदराज से आए लोग इस वीर बेटे को अंतिम सलाम करने के लिए रास्ते के दोनों ओर खड़े हो गए। वहीं पार्थिव शरीर पहुंचते ही मां, बहन और परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। अपनों के विलाप ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दी।
शहीद बेटे का ताबूत देख फफक पड़ी अम्मी
या अल्लाह। अब मुझे अम्मी कहकर कौन पुकारेगा? मेरी बेटी की शादी अब कौन कराएगा? इस परिवार का सहारा कौन बनेगा? मुझे मेरा बेटा लौटा दो। सरकार से मेरी बस यही गुहार है कि मेरा बेटा मुझे वापस कर दीजिए। शहीद दानिश का पार्थिव शरीर जैसे ही घर के दरवाजे पर पहुंचा, मां अख्तरी बेगम की चीख से पूरा माहौल गमगीन हो उठा। बहने शगुफ्ता और गजाला भी अपने भाई के ताबूत से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी आंखों से बहते आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अपने अम्मी-अब्बू और बहनों से बेहद मोहब्बत करने वाले घर के इकलौते बेटे की अंतिम एक झलक पाने की बेचैनी पूरे परिवार के चेहरे पर साफ दिख रही थी।
मां और बहनें बार-बार अधिकारियों से ताबूत खोलकर दानिश का चेहरा दिखाने की गुहार लगातीं और फिर बिलख पड़तीं। उधर, पिता फारुख के चेहरे पर टपकते पसीने की बूंदें, नम आंखें और खामोशी उनके भीतर उठ रहे उस तूफान की गवाही दे रही थीं, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। एक तरफ बेटे की शहादत पर गर्व था, तो दूसरी तरफ इकलौते बेटे को खो देने का ऐसा दर्द, जिसने पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया।
जन्नत में उच्च स्थान की दुआ मांगी
जनाजे का अदायगी: घर से बाहर जनाजे की नमाज अदा की उमड़ी भीड़ के कारण शहीद के पार्थिव शरीर को घर के बाहर सड़क पर ले जाया गया, जहां जनाजे की नमाज अदा की गई। नमाज में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, रिश्तेदार और आसपास के गांवों से आए लोग शामिल हुए। सभी ने शहीद के रूह की शांति और अल्लाह से जन्नत में उच्च स्थान की दुआ मांगी। नमाज खत्म होते ही वायुसेना के जवानों ने तिरंगे में लिपटे बॉक्स को लिए कब्रिस्तान में पहुंचे, जहां उन्हें सलामी दी गई। बाद में उन्हें कायमनगर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।
सैन्य सम्मान:पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद को दी गई अंतिम विदाई वायु सेना प्रमुख, एयर ऑफिसर कमाडिंग इन चीफ और स्टेशन कमांडर की ओर से वायुसेना अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। विंग कमांडर केके झा के साथ वायुसेना के दस अधिकारियों व 50 की संख्या में आये वायु सैनिकों ने शहीद को सलामी दी। जवानों ने राइफल वॉली के साथ हवा में गोलियां दाग शहीद को अंतिम सलामी दी।
इस दौरान डीएम तनय सुल्तानिया, एसपी राज, आरा एसडीएम विजय शिप्रा चौधरी ने बारी-बारी से शहीद पर पुष्पचक्र अर्पित किए। मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों में स्थानीय सांसद सुदामा प्रसाद, स्थानीय विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह, अगिआंव विधायक महेश पासवान, विधान पार्षद सोनू राय, पूर्व विधायक अनवर आलम, जिला पार्षद रवींद्र कुमार, मुखिया प्रतिनिधि रंजीत कुमार, राजद महासचिव मनोज सिंह और रघुपति यादव ने भी पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने नम आंखों से वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
सहानुभूति:डीएम और एसपी ने शहीद के पिता को ढांढस बंधाया बेटे के गम में डूबे पिता फारुख से डीएम और एसपी ने कब्रिस्तान में ही बातचीत की। पिता को ढांढस बंधाते हुए कहा कि शहीद दानिश आलम का सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा, समर्पण एवं कर्तव्यपरायणता का प्रतीक है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। जिला प्रशासन की ओर से शहीद के परिजनों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया गया।
- बाजार बंद: पूरा कायमनगर बाजार बंद रहा बगैर किसी आह्वान के कायमनगर बाजार के व्यवसायियों ने रविवार को अपनी-अपनी दुकानें बंद रखीं। नतीजतन पूरा बाजार सन्नाटे में डूबा रहा। लोगों की भीड़ से गुलजार रहने वाला बाजार रविवार को शहीद के आगमन पर खामोश दिखा। आरा- पटना फोरलेन पर अपने लाल के अंतिम दर्शन को भारी भीड़ जमी रही।
शहीद की अंतिम यात्रा: - 02.00 बजे रविवार को बिहटा एयरफोर्स में शहीद दानिश पार्थिव शरीर पहुंचा
- 2.50 कोईलवर पहुंचा पार्थिव शरीर लिए फूलों से लदा वाहन
- 3.30 कायमनगर बाजार पहुंचा पार्थिव शरीर
- 3.50 शहीद के घर पहुंचा पार्थिव शरीर
- 4.00 दानिश का पार्थिव शरीर आरा-पटना फोरलेन पर रखा गया
- 4.10 सड़क पर ही नमाज पढ़ी गई
- 4.20 वायुसेना के जवानों ने पार्थिव शरीर को कंधे पर रख कब्रिस्तान लाया
- 4.25 शहीद को वायुसेना प्रमुख की ओर से पुष्पचक्र अर्पित कर सलामी
- 4.30 शहीद के पिता को डीएम और एसपी ने ढाढस बंधाया
- 4.35 वायुसेना के जवानों ने गोलियां दाग सलामी दी
- 5.00 बजे सुपुर्द-ए-खाक




