Buxar BJP MLA – भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: बक्सर के भाजपा विधायक आनंद मिश्रा ने भरत तिवारी के परिजनों से की मुलाकात।
- हाइलाइट: Buxar BJP MLA
- उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच जिला पुलिस के बजाय सीआईडी को सौंपी जानी चाहिए
आरा। भोजपुर जिले का भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इसी क्रम में सोमवार, 29 जून 2026 को बक्सर विधानसभा से भाजपा विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव पहुंचे। उन्होंने मृतक भरत तिवारी के पिता और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और दुख की इस घड़ी में उनकी बातें सुनीं।
मुलाकात के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए आनंद मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि मामला न्यायिक जांच के अधीन है, इसलिए उन्हें पूरा भरोसा है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होगी। हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे जिला पुलिस के दायरे से निकालकर सीआईडी को सौंपा जाना चाहिए।
Buxar BJP MLA : गिरफ्तारी में देरी पर सवाल
इस एनकाउंटर में आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी पर भी विधायक ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर मुख्यमंत्री से बात करेंगे और सरकार का रुख जानने की कोशिश करेंगे। आनंद मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि समाज को वह न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए।
डीके बसु गाइडलाइन का किया जिक्र: कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने डीके बसु गाइडलाइन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो में जिस तरह से भरत तिवारी द्वारा हथियार फेंकने के बाद गोली मारने के कृत्य सामने आए हैं, वे न्याय के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ प्रतीत होते हैं। उन्होंने इसे मानवाधिकार के दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील मामला बताया और कहा कि हत्या का केस दर्ज होने के बाद जांच ही दोषियों का निर्धारण करेगी।
एसटीएफ को बुलाने का निर्णय : स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आनंद मिश्रा ने कहा कि किसी ऑपरेशन में एसटीएफ या अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाने का फैसला स्थानीय पुलिस की मांग पर ही होता है।
परिवार से 11-12 दिनों की देरी से मिलने के सवाल पर विधायक ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि निजी कारणों से वे बाहर थे, लेकिन पूरे मामले में वे लगातार स्थानीय प्रशासन, डीआईजी और एसपी के संपर्क में बने हुए थे। उन्होंने अंत में यह भी जोड़ा कि यदि भरत तिवारी की समस्याओं और उनकी मांगों को प्रशासन ने समय रहते गंभीरता से लिया होता, तो शायद आज की यह दुखद स्थिति उत्पन्न नहीं होती।




