Thursday, April 3, 2025
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भोजपुर के दो पार्षदों पर लटक गई है अयोग्यता की तलवार

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 29 फरवरी को अपराह्न 03:30 बजे की जायगी सुनवाई

अयोग्यता: भोजपुर जिले के शाहपुर नगर पंचायत के दो पार्षदों पर अयोग्यता की तलवार लटक गई है। बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (1) के तहत उन्हें पार्षद पद से अयोग्य घोषित किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है।

  • हाइलाइट :- खबरे आपकी
    • दो से अधिक जीवित संतान को लेकर है मामला
    • वाद संख्या 38/2023 – रीना देवी बनाम आशा देवी
    • वाद संख्या 59/2023 – मधुमाला कुमारी बनाम सहोदरी देवी
    • राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 29 फरवरी को अपराह्न 03:30 बजे की जायगी सुनवाई

आरा: भोजपुर जिले के शाहपुर नगर पंचायत के दो पार्षदों पर अयोग्यता की तलवार लटक गई है। बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (1) के तहत उन्हें पार्षद पद से अयोग्य घोषित किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दो से अधिक संतान होने के आरोप सिद्ध होने के बाद पद से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जायगा। दोनों ही मामलों की सुनवाई राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 29 फरवरी को अपराह्न 03:30 बजे होनी थी जो अब स्थगित हो गई है। जिसकी सुनवाई अगली तिथि पर की जायगी ।

BK

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वाद संख्या 38/2023 – रीना देवी बनाम आशा देवी

शाहपुर वार्ड 8 की पार्षद आशा देवी को पूर्व में ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया था। बावजूद इसके आशा देवी ने तथ्यों को छिपाकर गलत शपथ पत्र के आधार पर पार्षद शाहपुर नगर पंचायत के पद पर निर्वाचित होने में कामयाब रही। इसको लेकर रीना देवी ने आयोग को आवेदन देकर शिकायत की थी कि निर्वाचित पार्षद आशा देवी को दो से अधिक संतान है। बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 18 (1) के तहत रीना देवी ने आशा देवी के निर्वाचन को रद्द करने की मांग की है।

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वाद संख्या 59/2023 – मधुमाला कुमारी बनाम सहोदरी देवी

वही शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड संख्या 07 की पार्षद सहोदरी देवी के खिलाफ भी दो से अधिक जीवित संतान के मामले को लेकर मधुमाला कुमारी द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को आवेदन देकर शिकायत की गई है।

दो से अधिक जीवित संतान को लेकर क्या है प्रावधान

नगरपालिका अधिनियम में यह प्रावधान है कि चार अप्रैल, 2008 के बाद किसी भी प्रत्याशी को दो से अधिक जीवित संतान रहने के कारण चुनाव पूर्व नामांकन पत्रों की जांच के दौरान ही अयोग्य घोषित कर दिया जाना है।

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