Chaiti Chhath Mahaparv: लोक आस्था के महापर्व ‘चैती छठ’ के तीसरे दिन मंगलवार को आरा सहित पूरे भोजपुर जिले में श्रद्धा और भक्ति का अपूर्व संगम देखने को मिला।
- हाइलाइट: Chaiti Chhath Mahaparv
- नदी, तालाब एवं पोखर पर उमड़ी रही व्रतियों की भीड़
- घर की छतों पर भी लोगों ने डूबते सूर्य को दिया अर्ध्य
- छठी मैया के भक्ति गीतों पर झूमते रहे श्रोता
आरा। लोक आस्था के महापर्व ‘चैती छठ’ के तीसरे दिन मंगलवार को आरा सहित पूरे भोजपुर जिले में श्रद्धा और भक्ति का अपूर्व संगम देखने को मिला। चार दिवसीय इस अनुष्ठान के क्रम में व्रतधारियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को प्रथम अर्घ्य अर्पित कर परिवार, समाज और विश्व कल्याण की मंगल कामना की।
Chaiti Chhath Mahaparv: जिले के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया

मंगलवार की दोपहर के बाद से ही जिले के विभिन्न नदी घाटों, तालाबों, नहरों और पोखरों पर श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। पारंपरिक छठ गीतों से गुंजायमान रास्तों से होते हुए व्रती और उनके परिजन घाटों तक पहुँचे। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए शहर के प्रमुख तालाबों और नहरों के किनारे जनसैलाब उमड़ पड़ा। जहाँ एक ओर सार्वजनिक जलाशयों पर भारी भीड़ देखी गई, वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से अपने घरों की छतों पर ही कृत्रिम जलाशय बनाकर पूरी शुद्धता के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्रतियों ने जल में खड़े होकर भगवान सूर्य की उपासना की और सूप में फल, ठेकुआ तथा अन्य प्रसाद सजाकर भगवान भास्कर को नमन किया। इस दौरान वातावरण छठी मैया के मधुर और भक्तिपूर्ण गीतों से सराबोर रहा, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। श्रोता इन पारंपरिक गीतों के माध्यम से भक्ति भाव में डूबे रहे।
जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा
सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा। शांतिपूर्ण ढंग से पर्व संपन्न कराने के लिए विभिन्न संवेदनशील स्थानों और घाटों पर दंडाधिकारियों के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई थी। नगर थाना और नवादा थाना के प्रभारियों के नेतृत्व में पुलिस बल निरंतर गश्त करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
चार दिवसीय इस महापर्व का समापन बुधवार की सुबह होगा, जब व्रती उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करेंगे। इसके पश्चात पारण के साथ ही यह कठिन और पवित्र व्रत संपन्न हो जाएगा।


