Homeधर्मपर्व त्योहारबसंत पंचमी 2026: ज्ञान और कला का महापर्व सरस्वती पूजा आज

बसंत पंचमी 2026: ज्ञान और कला का महापर्व सरस्वती पूजा आज

Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मनाए जाने वाला यह त्योहार भारतीय संस्कृति में ज्ञान और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।

Bijay singh
  • हाइलाइट: Basant Panchami 2026
    • देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, संगीत और कला की देवी के रूप में पूजा जाता है

खबरे आपकी। आज देश भर में विद्या, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की उपासना का महापर्व ‘सरस्वती पूजा’ अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मनाए जाने वाला यह त्योहार भारतीय संस्कृति में ज्ञान और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। हिन्दू धर्म में ज्ञान, कला, संगीत और विद्या की देवी माँ सरस्वती को समर्पित यह अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन पर्व है।

देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, संगीत और कला की देवी के रूप में पूजा जाता है। वह ब्रह्मा जी की प्रिया हैं और समस्त सृष्टि में ज्ञान के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। उनकी श्वेत वस्त्र धारण की हुई छवि शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है, जबकि उनके हाथों में वीणा संगीत और कला का प्रतिनिधित्व करती है। कमल पर आसीन माँ सरस्वती ज्ञान की शांति और संतुलन को दर्शाती हैं, जो हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य के प्रकाश की ओर ले जाती हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

बसंत पंचमी 2026 सरस्वती पूजा मुहूर्त: सरस्वती पूजा के लिए वैसे तो किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है क्योंकि, इस दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है लेकिन, विशेष रुप से शुभ चौघडिया मुहूर्त में की गई पूजा पाठ से ज्ञान की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों के लिए यह मुहूर्त विशेष रुप से लाभकारी माना गया है। जिन बच्चे का शिक्षा संस्कार इस दिन किया जाता है उन्हें भी मुहूर्त का ख्याल करते हुए ही पूजा करनी चाहिए।

  • चल चौघडिया सुबह में 7 बजकर 13 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक
  • लाभ चौघडिया सुबह में 8 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक
  • अमृत चौघडिया सुबह 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक

सरस्वती पूजा के अवसर पर भक्तगण पीले वस्त्र धारण कर माँ की उपासना करते हैं। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। घरों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है और विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन पुस्तकों, कलमों, वाद्ययंत्रों और अन्य कला सामग्री की पूजा की जाती है, ताकि ये वस्तुएँ ज्ञान और कला के माध्यम बनें और इनके उपयोग से सफलता प्राप्त हो। कई स्थानों पर बच्चों को ‘हाथे खड़ी’ यानी अक्षर ज्ञान की शुरुआत भी इसी शुभ दिन पर कराई जाती है, यह मानते हुए कि माँ सरस्वती के आशीर्वाद से उन्हें विद्या ग्रहण करने में सुगमता होगी।

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RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।

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