HomeNewsबिहारशाहपुर नगर पंचायत में विकास का कार्य चंदे की खैरात पर

शाहपुर नगर पंचायत में विकास का कार्य चंदे की खैरात पर

Development work in Shahpur: नगर पंचायत की उपमुख्य पार्षद झुनीया देवी ने कहा की यदि नगर पंचायत का बजट उपलब्ध था, तो सड़क निर्माण के लिए चंदा लेने की नौबत क्यों आई?

  • हाइलाइट: Development work in Shahpur
  • विकास का कार्य चंदे की खैरात पर: उपमुख्य पार्षद ने उठाये सवाल
  • नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष गुप्ता जी ने बताया सोची-समझी रणनीति

आरा, भोजपुर। जिले के शाहपुर नगर पंचायत में विकास के नाम पर एक अत्यंत ही विचित्र और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। आमतौर पर किसी भी नगर निकाय में सड़कों का निर्माण सरकारी बजट, विधिवत टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी मानकों के अनुसार होता है। लेकिन शाहपुर में सड़कों का निर्माण इन स्थापित प्रक्रियाओं के उलट आम जनता से चंदा इकट्ठा करके करवाया गया है। मानक विहीन इन सड़कों के बारे में पूछे जाने पर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी शुभम कुमार के समक्ष एक अधिकारी ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि इन सड़कों का निर्माण स्थानीय पार्षद द्वारा जन सहयोग से एकत्र किए गए धन से हुआ है।

यह पूरी कार्यप्रणाली पारदर्शिता के बुनियादी सिद्धांतों पर कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर किन लोगों ने और कितनी राशि का चंदा दिया है, इसका कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है। न ही निर्माण स्थल पर कोई ऐसा सूचना बोर्ड लगाया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि ये सड़कें चंदे के पैसे से बनी हैं। आज के सोशल मीडिया के युग में जब लोग धार्मिक या छोटे-मोटे सामाजिक कार्यों में भी अपनी सहभागिता को फोटो साझा करना नहीं भूलते हैं, तब इतने बड़े निर्माण कार्य के दानदाताओं का गुप्त रहना कई संदेहों को जन्म देता है।

Development work in Shahpur: गुणवत्ता मानकों का पालन

जब विकास कार्यों की जवाबदेही सरकारी तंत्र और संवैधानिक नियमों से हटकर निजी सहयोग या चंदे पर आधारित हो जाती है, तो वहां पारदर्शिता और गुणवत्ता के मानकों का पालन होना लगभग असंभव हो जाता है। यह स्थिति न केवल नगर शासन की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि भ्रष्टाचार के नए रास्तों को भी प्रशस्त करती है। यदि इन सड़कों की गुणवत्ता भविष्य में खराब होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसके पास होगी? क्योंकि न तो यह कार्य किसी टेंडर के तहत हुआ है और न ही इसमें सरकारी इंजीनियरों की निगरानी का कोई स्पष्ट प्रमाण है।

शिकायत करने पर जबाब मिलेगा चंदे की खैरात से बनी है सड़क

नगर के पूर्व उपाध्यक्ष गुप्तेश्वर साह उर्फ गुप्ता जी ने कहा की इस पूरे घटनाक्रम को एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए। अगर आप किसी भी सड़क की गुणवता की शिकायत नगर कार्यालय में करेंगे, तो हो सकता है की आपको जबाब यह मिले की उक्त सड़क चंदा के पैसे से बनाई गई है। वार्ड संख्या-03 की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा की अक्सर जब मानक विहीन विकास को लेकर जनता का आक्रोश बढ़ता है, तो उसे शांत करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं। एक बार मामला ठंडा पड़ जाने के बाद नगर प्रशासन और जनप्रतिनिधि पुनः अपनी पुरानी कार्यप्रणाली में लौट आते हैं।

विकास का कार्य चंदे की खैरात पर: उपमुख्य पार्षद ने उठाये सवाल

इधर, नगर पंचायत की उपमुख्य पार्षद झुनीया देवी ने कहा की यदि नगर पंचायत का बजट उपलब्ध था, तो सड़क निर्माण के लिए चंदा लेने की नौबत क्यों आई? क्या सरकारी तंत्र विफल हो चुका है या फिर यह फंड के गबन को छिपाने का एक तरीका है? उन्होंने कहा की विकास का कार्य चंदे की खैरात पर नहीं, बल्कि नगर सरकार की जवाबदेही और नियमानुसार होना चाहिए। लिपा-पोती करने के बजाए नपं प्रशासन को इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए ताकि भविष्य में सार्वजनिक कार्यों की आड़ में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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