Shahpur Nagar Panchayat: शाहपुर नगर पंचायत: पहले बनी सड़क, पांच महीने बाद कागजों में हुआ ‘खेल’—विकास या भ्रष्टाचार की नई कहानी?
- हाइलाइट: Shahpur Nagar Panchayat
- उपमुख्य पार्षद ने कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर मांगा था जवाब
- लेकिन कार्यपालक द्वारा ना ठोस कार्रवाई हुई और ना ही पत्र का जबाब दिया
- कहा: इस पूरे मामले को कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा छुपाने कोशिश की गई
आरा,भोजपुर। जिले के शाहपुर नगर पंचायत में इन दिनों विकास कार्यों की जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, उसने न केवल आम जनता को हैरान कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। आलम यह है कि यहां नियमों को ताक पर रखकर विकास की एक ऐसी इबारत लिखी गई है, जहां पहले काम पूरा कर लिया गया है और उसके महीनों बाद सरकारी फाइलों में उसे ‘वैध’ बनाने की कवायद शुरू की गई है।
Shahpur Nagar Panchayat: शाहपुर नपं में विकास की उल्टी गंगा
शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड संख्या-03 का यह पूरा मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगता। आमतौर पर नियम यह कहता है कि किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले सशक्त स्थायी समिति की स्वीकृति और बाकायदा बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है। लेकिन शाहपुर नगर पंचायत में गंगा ही उल्टी बह रही है। यहाँ एक सड़क का निर्माण कार्य बिना किसी पूर्व प्रस्ताव के ही पूरा कर लिया गया। ताज्जुब की बात तो यह है कि जब सड़क बनकर तैयार हुई और संवेदक पैसों के लिए नगर पंचायत कार्यालय की दौड़ लगाने लगा, तब जाकर नगर प्रशासन को नियम-कानूनों की याद आई।
15 लाख से ज्यादा की लागत, सड़क को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया
सड़क निर्माण के लगभग पांच महीने बीत जाने के बाद, आनन-फानन में सशक्त स्थायी समिति की बैठक बुलाई गई। 10 जुलाई 2024 को आयोजित इस बैठक की कार्यवाही पुस्तिका (प्रोसीडिंग बुक) में एक ऐसा खेल किया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। पहले से बनी हुई उसी सड़क को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया और उसे नए सिरे से बनाने का प्रस्ताव दर्ज कर लिया गया। जानकारों की मानें तो यह पूरी प्रक्रिया केवल सरकारी धन की निकासी के लिए की गई एक सोची-समझी कागजी खानापूर्ति है।
इधर, उपमुख्य पार्षद झुनीया देवी से जब इस मामले में पूछा गया तो, उपमुख्य पार्षद के अनुसार, उन्होंने पहले ही इस विषय पर कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर जवाब मांगा था, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ना ही उनके पत्र का कोई जबाब दिया गया।
उच्च स्तरीय जांच के लिए प्रधान सचिव को पत्र लिखेंगी उपमुख्य पार्षद
उपमुख्य पार्षद ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बताया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को औपचारिक पत्र लिखेंगी। उनका तर्क है कि बिना प्रशासनिक स्वीकृति के कोई कार्य कैसे संपन्न हो सकता है और बाद में किन परिस्थितियों में उसे वैध बनाने की कोशिश की गई, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
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