Dularchand Yadav: बिहार में ‘सुशासन’ के दावों के बीच दुलारचंद यादव की हत्या जिन्हें अनंत सिंह के मुखर विरोधी के रूप में जाना जाता था। समर्थकों का कहना है कि यादव को पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ियों से कुचला गया।
- हाइलाइट: Dularchand Yadav
- दुलारचंद यादव, जिन्हें अनंत सिंह के मुखर विरोधी के रूप में जाना जाता था
- समर्थकों के आरोप, यादव को पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ियों से कुचला गया
बिहार में दुलारचंद यादव की नृशंस हत्या ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यह घटना उस समय हुई है जब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लागू है, और ऐसे समय में एक प्रमुख व्यक्ति की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या और फिर गाड़ी से कुचलने के आरोप ‘सुशासन’ के दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
दुलारचंद यादव, जिन्हें अनंत सिंह के मुखर विरोधी के रूप में जाना जाता था, की हत्या के बाद उनके समर्थकों के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। उनका कहना है कि यादव को पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ियों से कुचला गया। मीडिया कर्मी को दिए ब्यान में अनंत सिंह का दावा है कि पहले हमला दुलारचंद यादव की ओर से हुआ था। यह विरोधाभास जांच का विषय है, परंतु एक बात स्पष्ट है कि इस घटना ने चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
तेजस्वी यादव ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि आचार संहिता के दौरान इतनी बड़ी संख्या में हथियार लेकर कोइ कैसे घूम रहा है। उन्होंने अनंत सिंह के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला दिया, जिसमें उनके घर से एके-47 की बरामदगी और चुनाव से ठीक पहले 100 राउंड फायरिंग का आरोप शामिल है। यह प्रश्न अनुत्तरित है कि ऐसे गंभीर आरोपों के बावजूद अनंत सिंह को चुनाव से पहले जमानत कैसे मिली। यह घटना सत्ता पक्ष पर भी सवाल उठाती है, कि क्या कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को राजनीतिक लाभ के लिए छूट दी जा रही है?



