Rajnit Prasad: राजनीति प्रसाद जी देश के महान समाजवादी नेता पूर्व सांसद मधुलिमय जी के बहुत बड़े भक्त थे।
- हाइलाइट: Rajnit Prasad
- राजद परिवार, प्रदेश और देश के लिए एक अपूर्णीय: भाई दिनेश
पटना, बिहार: वरिष्ठ समाजवादी नेता, पूर्व सांसद एवं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छात्र जीवन के अभिन्न मित्र राजनीति प्रसाद के आकस्मिक निधन की दुःखद खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर व्याप्त हो गई है। पटना के फोर्ड अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। इधर, इस समाचार को सुनते ही राष्ट्रीय जनता दल के नेता और जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने अपने क्षेत्र के पूर्व निर्धारित दर्जनों कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया और पटना के लिए प्रस्थान किया।
भाई दिनेश ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।” उन्होंने आगे कहा कि राजनीति प्रसाद जी का निधन केवल राजद परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रदेश और देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति है, जिसकी निकट भविष्य में भरपाई होना असंभव प्रतीत हो रहा है।
Rajnit Prasad : मधुलिमय जी के बहुत बड़े भक्त थे- भाई दिनेश
भाई दिनेश ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें राजनीति प्रसाद जी के सानिध्य में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। राजनीति प्रसाद जी देश के महान समाजवादी नेता पूर्व सांसद मधुलिमय जी के बहुत बड़े भक्त थे। वे प्रत्येक वर्ष 8 जनवरी को मधुलिमय जी की जयंती और 1 मई को उनकी पुण्यतिथि एक ही स्थान, पटना के ए.एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट में, विगत 30 वर्षों से नियमित रूप से मनाते रहे थे। यह उनकी समाजवादी विचारधारा के प्रति अटूट निष्ठा का प्रमाण था।
आजीवन सादगीपूर्ण तरीके से सामान्य जीवन: भाई दिनेश ने उनके व्यक्तित्व का वर्णन करते हुए कहा कि राजनीति प्रसाद जी एक महान समाजवादी नेता थे। उन्हें कभी भी पद का लोभ नहीं रहा, न ही उन्हें किसी प्रकार का घमंड छू पाया। वे आजीवन सादगीपूर्ण तरीके से सामान्य जीवन जीने में विश्वास रखते थे और उसी आदर्श का पालन करते रहे।
एक अभिभावक और एक राजनीतिक गुरु खो दिया है- भाई दिनेश: “राजनीति प्रसाद जी का निधन मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है। आज मैंने अपना एक अच्छा मार्गदर्शक, एक अभिभावक और एक राजनीतिक गुरु खो दिया है।” भाई दिनेश ने भावुक होकर बताया कि छात्र जनता दल और छात्र राजद के वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति में राजनीति प्रसाद जी का अहम योगदान था। वे हमेशा उनका मार्गदर्शन करते रहे और उन्हें प्रेरणा देते रहे।

