Procession Shahpur: सेमरिया मार्ग से बनाही रोड तक कचरे और बजबजाती नालियों के बीच चलने को मजबूर हुए श्रद्धालु; स्थानीय लोगों ने नगर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया
- हाइलाइट: Procession Shahpur
- 17 लाख रुपये से अधिक के मासिक सफाई खर्च के बावजूद गंदगी से बेहाल शाहपुर नपं
- सफाई कार्यों पर होने वाले खर्च व वार्ड सहित मजदूरों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
शाहपुर/आरा। शाहपुर नगर प्रशासन की सफाई व्यवस्था के दावों पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के डोल विसर्जन जुलूस के दौरान श्रद्धालुओं और आम लोगों को जगह-जगह फैली गंदगी, कचरे और बजबजाती नालियों के बीच से गुजरना पड़ा। जुलूस के मार्ग में सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा का डोल विसर्जन जुलूस पूरे उत्साह, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ के साथ निकले इस धार्मिक जुलूस में ऊंट, घोड़े, आकर्षक झांकियां, ढोल-नगाड़े और बैंड-बाजे लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
जुलूस के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की सजीव झांकियों के साथ विभिन्न देवी-देवताओं के प्रतिरूप भी प्रस्तुत किए गए। कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधान पहनकर ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे की धुन पर नृत्य प्रस्तुत किया। झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जुटी रही।
Procession Shahpur: कचरे और दुर्गंध के बीच निकला जुलूस
धार्मिक उत्साह और उमंग के बीच जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं को नगर की खराब सफाई व्यवस्था का सामना करना पड़ा। वार्ड संख्या-08 के सेमरिया सड़क मार्ग, एनएच-84 आरा-बक्सर मुख्य मार्ग, शाहपुर थाना मोड़ और बनाही रोड के आसपास कई स्थानों पर कचरा फैला हुआ दिखाई दिया। कई जगहों पर नालियां गंदगी से भरी और बजबजाती नजर आईं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, गंदगी और नालियों से उठ रही दुर्गंध के कारण श्रद्धालु और आम नागरिक पूरे रास्ते नाक पर रुमाल रखकर चलते दिखाई दिए। जुलूस में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी थी, ऐसे में गंदगी और दुर्गंध ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि त्योहार और जुलूस को देखते हुए नगर प्रशासन को पहले ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की सूचना दी गई थी। इसके बावजूद जुलूस के मार्गों पर अपेक्षित सफाई नहीं कराई गई। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रमुख मार्गों और धार्मिक आयोजनों के दौरान भी सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि नगर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था के नाम पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लोगों के मुताबिक, सफाई पर नगर प्रशासन का मासिक खर्च 17 लाख रुपये से अधिक बताया जाता है। इसके बावजूद सार्वजनिक मार्गों, नालियों और प्रमुख स्थानों पर गंदगी का बने रहना नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
नागरिकों का कहना है कि यदि नियमित रूप से सफाई कराई जाती और त्योहार से पहले विशेष सफाई अभियान चलाया जाता, तो जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लोगों ने नगर प्रशासन द्वारा नियमित सफाई, नालियों की उड़ाही और कचरा उठाव की स्थायी व्यवस्था नहीं होने पर आक्रोश व्यक्त किया और संबंधित एजेंसी पर कारवाई करने की मांग की है।
सफाई खर्च और भुगतान की पारदर्शिता की जांच की मांग
सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर खर्च और भुगतान की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने सफाई कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि कागजों पर सफाई कार्य पूरा दिखाया जा रहा है, जबकि धरातल पर स्थिति अलग नजर आ रही है।
हालांकि, सफाई व्यवस्था में कथित घोटाले, मजदूरों की नियुक्ति और भुगतान से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। इस संबंध में नगर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद खबर को और विस्तृत किया जायेगा।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर क्षेत्र में सफाई कार्यों पर होने वाले खर्च व वार्ड सहित मजदूरों का विवरण सार्वजनिक किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सफाई के लिए स्वीकृत राशि का वास्तविक उपयोग जमीनी स्तर पर दिखाई दे।










