Shahpur municipal Border: शाहपुर नगर पंचायत की सीमा 2007 के बाद नहीं बदली, जबकि आबादी और शहरी विस्तार कई गुना बढ़ा; वार्ड 10 और 11 में कराए गए विकास कार्यों की राशि निकासी पर उठे सवाल
- हाइलाइट: Shahpur municipal Border
- नगर सीमा से बाहर बनीं PCC सड़कें और नालियां, भुगतान पर सीमा विस्तार की अड़चन
- 18 साल में बदली शाहपुर की तस्वीर, नगर पंचायत की सीमाएं अब भी पुरानी
- कृषि भूमि पर बस गईं रिहायशी कॉलोनियां, NH-922 के आसपास बढ़ीं व्यावसायिक गतिविधियां
शाहपुर/आरा। भोजपुर जिले के प्रमुख शहरी निकायों में शामिल शाहपुर नगर पंचायत क्षेत्र की आबादी और भौगोलिक विस्तार पिछले करीब 18 वर्षों में तेजी से बढ़ा है। कृषि योग्य भूमि पर नई रिहायशी कॉलोनियां बस गई हैं, बहुमंजिली इमारतों का निर्माण हुआ है और राष्ट्रीय राजमार्ग-922 (फोरलेन सड़क) बनने के बाद व्यावसायिक गतिविधियों का दायरा भी लगातार बढ़ा है। इसके बावजूद नगर पंचायत की आधिकारिक सीमा आज भी लगभग उसी स्थिति में बनी हुई है, जैसी वर्ष 2007 से पहले निर्धारित की गई थी।
सीमा और वास्तविक शहरी विस्तार के बीच बनी इस खाई का असर अब नगर पंचायत की विकास योजनाओं और उनके भुगतान पर दिखाई देने लगा है। आरोप है कि नगर पंचायत की ओर से सीमा क्षेत्र से बाहर भी PCC सड़क, नाला निर्माण और अन्य विकास कार्य कराए गए हैं। अब इन योजनाओं की राशि के भुगतान और निकासी को लेकर तकनीकी एवं प्रशासनिक अड़चन सामने आ रही है। खासकर वार्ड संख्या 10 और 11 में कराए गए कार्यों को लेकर सीमा विवाद सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है।
Shahpur municipal Border: 2007 के चुनाव में तय हुई थी 11 वार्डों की सीमा
शाहपुर नगर पंचायत के वर्तमान स्वरूप का निर्धारण वर्ष 2007 में होने वाले प्रथम नगर निकाय चुनाव से पहले किया गया था। उस समय तत्कालीन आबादी, भौगोलिक स्थिति और संबंधित मौजों को आधार बनाकर नगर पंचायत में कुल 11 वार्डों का गठन किया गया था। उस समय जिस क्षेत्र को नगर पंचायत की सीमा में शामिल किया गया था, वह तत्कालीन शहरी आबादी और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं के लिहाज से निर्धारित किया गया था।
हालांकि, वर्ष 2007 के बाद शाहपुर की आबादी में लगातार वृद्धि हुई। शहर का फैलाव आसपास के ग्रामीण एवं राजस्व क्षेत्रों तक पहुंच गया। पहले जहां कृषि भूमि और खाली भूखंड दिखाई देते थे, वहां अब घर, दुकानें, निजी संस्थान और रिहायशी कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। इसके बावजूद नगर पंचायत की सीमा का नए सिरे से सर्वेक्षण या पुनर्निर्धारण नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ऐसे इलाके, जो व्यवहारिक रूप से शाहपुर शहर का हिस्सा हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में अभी भी नगर पंचायत की सीमा से बाहर माने जाते हैं।
सीमा क्षेत्र के बाहर कराए गए कार्यों से बढ़ी परेशानी
नगर पंचायत क्षेत्र में सड़क, नाला, जलनिकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। शहर के विस्तार के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों ने नगर पंचायत से विकास कार्य कराने की मांग की। इसी क्रम में कुछ क्षेत्रों में PCC सड़क, नाला निर्माण और अन्य योजनाओं को स्वीकृति देकर कार्य कराया गया।
अब समस्या यह है कि जिन स्थानों पर कार्य कराया गया है, उनमें से कुछ क्षेत्र आधिकारिक नगर पंचायत सीमा से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसे में योजनाओं के अभिलेख, स्थल की स्थिति और सीमा निर्धारण के बीच सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है। इस कारण कार्य पूर्ण होने के बावजूद भुगतान और राशि निकासी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
विशेष रूप से वार्ड संख्या 10 और 11 में कराए गए विकास कार्यों का भुगतान सीमा विस्तार से जुड़े मुद्दे के कारण अटकने की बात सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नगर पंचायत की सीमा से बाहर के क्षेत्रों में कार्य कराया गया, तो योजना स्वीकृति से पहले स्थल की प्रशासनिक स्थिति का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था।
पूर्व दिशा में वार्ड-08 और 10 है, NH-84 समत गोसाई तक सीमित है सीमा
शाहपुर नगर पंचायत की वर्तमान चौहद्दी का अवलोकन करने पर आधिकारिक सीमा और वास्तविक शहरी विस्तार के बीच अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। पूर्व दिशा में पेट्रोल पंप के समीप स्थित समत गोसाई, जिसे स्थानीय स्तर पर होलिका दहन स्थल के रूप में भी जाना जाता है, वार्ड संख्या 08 व 10 की अंतिम सीमा मानी जाती है। लेकिन, शाहपुर का राजस्व मौजा इस स्थान से काफी आगे तक फैला हुआ बताया जाता है। इस क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में रिहायशी गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ है। कई जगह बहुमंजिली इमारतों का निर्माण हो चुका है और नए आवासीय व व्यवसायिक क्षेत्र भी विकसित हो रहे हैं।
पश्चिम दिशा में भी सीमा और राजस्व मौजा में अंतर
पश्चिम दिशा में सोभी टोला बोलबम चिमनी और मिश्रवालिया जाने वाली सड़क को वार्ड संख्या 01 की अंतिम सीमा के रूप में चिह्नित किया गया है। दूसरी ओर, शाहपुर राजस्व मौजा का विस्तार इटवा स्थित मंदिर के बीच तक बताया जाता है। इससे एक ही राजस्व मौजा का कुछ हिस्सा अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों में बंटा हुआ दिखाई देता है।
बिहिया प्रखंड की शिवपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले इटवा गांव के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इससे प्रशासनिक सीमाओं को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। नागरिकों को कई बार यह परेशानी झेलनी पड़ी है। बड़ा विवाद भी सामने आया था, दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे के खिलाफ खड़े थे, लेकिन स्थानीय नागरिकों की सूझबूझ से मामले को सलटाया गया। परंतु सीमा विवाद के कारण सुविधा की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है अथवा पंचायत स्तर के विभागों की? समस्या बरकरार है। इस तरह की अस्पष्टता को अनिवार्य रूप से दूर करना चाहिए।
उत्तर में गोपालपुर तक निर्धारित है सीमा:नगर पंचायत की उत्तर दिशा में वार्ड संख्या 07 के तहत गोपालपुर गांव तक सीमा निर्धारित बताई जाती है। हालांकि, शहर की आबादी और निर्माण गतिविधियां इस सीमा के आसपास भी बढ़ रही हैं।
दक्षिण दिशा में वार्ड 10 और 11 सबसे अधिक प्रभावित: दक्षिण दिशा में नगर पंचायत के वार्ड संख्या 10 और 11 सीमा विवाद से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। वार्ड संख्या 10 में सरकारी बोरिंग, जिसे स्थानीय तौर पर पुरैना बोरिंग वाली सड़क कहा जाता है, को अंतिम सीमा माना गया है। जबकि शाहपुर का राजस्व मौजा इस सीमा से काफी आगे तक विस्तारित बताया जाता है।
NH-922 के दक्षिणी हिस्से में पहले कृषि भूमि का वर्चस्व था, लेकिन अब इस क्षेत्र में तेजी से रिहायशी विकास हो रहा है। सड़क किनारे और आसपास कई नए मकान, आवासीय परिसर और अन्य निर्माण दिखाई देने लगे हैं। इसी क्षेत्र में नगर पंचायत की ओर से PCC सड़क निर्माण जैसे कार्य कराए जाने की बात सामने आई है।
वार्ड संख्या 11 में पूर्व दिशा में नेटूअईनिया माई तक जाने वाली सड़क और दक्षिण दिशा में बनाही सड़क के पूर्वी भाग में मिशन स्कूल से आगे तक का इलाका सीमा निर्धारण माना जाता है। लेकिन, प्रशासनिक रिकॉर्ड में इनकी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण विकास कार्यों की स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
सीमा विस्तार के प्रस्ताव पर नहीं हुई गंभीर पहल: शाहपुर नगर पंचायत के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के अनुसार, पिछले 18 वर्षों में नगर पंचायत की बोर्ड बैठकों में सीमा विस्तार का प्रस्ताव कभी गंभीरता से नहीं लाया गया। उनका कहना है कि समय के साथ शहर का स्वरूप बदलता गया, लेकिन नगर पंचायत का सीमांकन पुरानी स्थिति में ही बना रहा।
अब ठोस पहल की दरकार: शाहपुर नगर पंचायत की मौजूदा स्थिति यह बताती है कि शहर का भौगोलिक और सामाजिक विस्तार प्रशासनिक सीमाओं से काफी आगे निकल चुका है। वर्ष 2007 में निर्धारित 11 वार्डों की सीमा उस समय की जरूरतों के अनुरूप रही होगी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उसका पुनर्मूल्यांकन जरूरी हो गया है।










