- हाइलाइट:- Jawainia – MLA
- माँ गंगा यहां आई नहीं है, बल्कि इन्हें बुलाया गया है:- विधायक
- विधायक की अपील, कमेटी बनाकर जवइनिया गांव के लिए फंड इकट्ठा करें
बिहार(आरा) शाहपुर। गंगा नदी में तकरीबन विलीन हो चुके शाहपुर अंचल के जवइनिया गांव के विस्थापित परिवारों से स्थानीय विधायक राहुल तिवारी ने मंगलवार को बांध पर चल रहे राहत शिविर में जाकर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वहां के लोगों की समस्याओं को सुना और उनके दर्द को समझने का प्रयास किया। विधायक राहुल तिवारी ने न केवल गांव के लोगों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाई, बल्कि इस संकट के समय में गांव के लोगों को एक नई जिंदगी देने के लिए गांव के पुनर्वास की दिशा में प्रयासरत रहने की बात कही।
विधायक ने कहा कि गंगा मां यहां आई नहीं है, बल्कि इन्हें बुलाया गया है। उनका तात्पर्य था कि गंगा नदी के कछार से भारी मात्रा में सफेद बालू का दोहन किया गया है, जिसके कारण गंगा नदी के रूट में बदलाव और कटाव शुरू हो गया है। यह स्थिति न केवल इस गांव के लिए बल्कि गंगा तटीय क्षेत्र के अन्य गांव के लिए भी चिंताजनक है।
Jawainia – MLA – जवइनिया गांव को बसाने का हो कार्य
विधायक ने कहा कि अब परिस्थियां बदल चुकी हैं और अब जवइनिया गांव को बसाने का कार्य होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, जैसे सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक कार्यकर्ता, और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे एक कमेटी बनाकर फंड इकट्ठा करें। इस फंड का उपयोग गांव के लोगों को एक जगह सारी सुविधाओं के साथ बसाने के कार्य में किया जाए। उनका मानना है कि भले ही जवइनिया गांव का भौगोलिक स्थिति समाप्त हो गया हो, लेकिन गांव का अस्तित्व बचाना अत्यंत आवश्यक है।
विधायक ने यह भी कहा कि गांव अब पिकनिक स्पॉट की तरह हो गया है, जहां लोग घूमने आते हैं, लेकिन यहां के लोगों का दर्द देखकर कई समाजसेवी भी यहां पहुंचे हैं। उन्होंने राहत सामग्री का वितरण भी किया, लेकिन विधायक ने यह स्पष्ट किया कि अब तात्कालिक राहत के साथ-साथ स्थायी समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मिलकर प्रयास सार्थक हो और सही तरीके से गांव को बचाने का कार्य किया जाए।
राहुल तिवारी ने कहा कि हमलोगों की पहली प्राथमिकता गांव को फिर से बसाने का होना चाहिए। यदि इन्हें बसाया नहीं गया तो स्थिति और भी विकट हो जाएगी। गांव के कटाव पीड़ित लोग इधर-उधर भटकाव की जिंदगी बसर करने लगेंगे। उन्होंने एक व्यापक योजना की बात कही, जिसमें न केवल राहत कार्य शामिल हो, बल्कि गांव के पुनर्वास के लिए दीर्घकालिक उपाय भी हों। स्थानीय प्रशासन और गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्थायी वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।



