Homeअन्यट्रेंडिंग न्यूजभरत तिवारी के मोबाइल से साक्ष्यों के मिटने का रहस्य गहराया

भरत तिवारी के मोबाइल से साक्ष्यों के मिटने का रहस्य गहराया

Bharat Tiwari mobile phone: चर्चाओं के अनुसार, भरत तिवारी के मोबाइल में जवाइनिया विस्थापितों के नाम पर घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद थे। क्या उन साक्ष्यों को भी मिटा दिया गया है ताकि घोटाले के असली सूत्रधार बेनकाब न हो सकें?

  • हाइलाइट: Bharat Tiwari mobile phone
  • भरत तिवारी का मोबाइल फोन इस समय किसके कब्जे में है?
  • उसमें से डेटा को कौन और किस अधिकार से हटा रहा है?
  • साक्ष्य मिटाने वालों का पर्दाफाश किया जाए- राकेश तिवारी

आरा। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होता है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास ही उस व्यवस्था की नींव है। परंतु, हाल के दिनों में भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने कई ऐसे गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं जो न केवल प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि न्याय की निष्पक्षता को भी संदिग्ध बनाते हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे चिंताजनक पहलू उस डिजिटल साक्ष्य का गायब होना है, जिसे एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा था।

घटनाक्रम के अनुसार, 17 जून का वह अंतिम वीडियो अत्यंत महत्वपूर्ण था जिसमें भरत तिवारी को पुलिस के समक्ष अपनी पिस्टल फेंककर आत्मसमर्पण करते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह वीडियो उस दिन की घटनाओं का सबसे पुख्ता प्रमाण था। आश्चर्यजनक रूप से, अब यह वीडियो उनके आधिकारिक पेज से हटा दिया गया है। गौरतलब है कि 17 जून के अन्य वीडियो अभी भी पेज पर उपलब्ध हैं, लेकिन केवल उसी फुटेज को हटाया जाना, जिसमें आत्मसमर्पण की प्रक्रिया दिखाई दे रही थी, किसी सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है।

यह केवल एक वीडियो के हटने का मामला नहीं है, बल्कि यह साक्ष्यों को मिटाने के उस सुनियोजित खेल का हिस्सा प्रतीत होता है जो परदे के पीछे से खेला जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भरत तिवारी का मोबाइल फोन इस समय किसके कब्जे में है? उसमें से डेटा को कौन और किस अधिकार से हटा रहा है? डिजिटल फॉरेंसिक के इस युग में, किसी भी साक्ष्य को हटाना या उसमें फेरबदल करना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

Bharat Tiwari mobile phone: क्या दफन हो गया भारी-भरकम घोटाले का राज?

इस प्रकरण का एक और काला अध्याय जवाइनिया विस्थापितों के नाम पर कथित 1400 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा है। चर्चाओं के अनुसार, भरत तिवारी के मोबाइल में इस भारी-भरकम घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद थे। क्या उन साक्ष्यों को भी मिटा दिया गया है ताकि घोटाले के असली सूत्रधार बेनकाब न हो सकें? यदि साक्ष्य सुरक्षित नहीं हैं, तो जांच की विश्वसनीयता पर स्वतः ही प्रश्नचिह्न लग जाता है।

यह पूरी घटना एक भयावह परिदृश्य को जन्म देती है, जहाँ यह संदेह उत्पन्न होता है कि भरत तिवारी को एक सुनियोजित तरीके से समाप्त किया गया ताकि वे उस बड़े आर्थिक घोटाले के राज को कभी उजागर न कर सकें। साक्ष्य मिटाने का यह खेल इस बात की पुष्टि करता है कि भरत तिवारी ने जिन पर आरोप लगाया था, उन्हे सच्चाई बाहर आने का डर सता रहा था। एक व्यक्ति को रास्ते से हटा देना आसान हो सकता है, लेकिन उसके द्वारा छोड़े गए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करना न्याय के साथ खिलवाड़ है।

साक्ष्य-विनाश के खेल को संचालित करनेवालों का पर्दाफाश हो- राकेश तिवारी

इधर, स्थानीय निवासी सह प्रखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी ने कहा कि एक तरफ कथित एनकाउंटर की जांच चल रही है और दूसरी तरफ भरत तिवारी के फेसबुक पेज से अंतिम वीडियो मिटा दिया गया। उनके मोबाइल से जवाइनिया विस्थापितों के असली गुनहगार को बचाने के लिए डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने का खेल चल रहा है। भरत तिवारी का मोबाइल किसके पास है और उसका उपयोग कौन कर रहा है? क्या हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहाँ सत्ता और रसूख का उपयोग करके साक्ष्यों को डिजिटल दुनिया से भी मिटाया जा सकता है?

उन्होंने कहा कि अब यह आवश्यक है कि उन तमाम साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच हो और उन लोगों का पर्दाफाश किया जाए जो पर्दे के पीछे से इस पूरे साक्ष्य-विनाश के खेल को संचालित कर रहे हैं। यदि 1400 करोड़ के घोटाले के गुनहगारों को बचाना ही इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य था, तो यह न केवल भरत तिवारी के साथ अन्याय है, बल्कि जवाइनिया के उन विस्थापितों के साथ भी धोखा है जिनके हक का पैसा कहीं और ठिकाने लगा दिया गया। न्याय की मांग है कि सच सामने आए, चाहे वह किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की कुर्सी के नीचे क्यों न छिपा हो।

Khabre Apki
Khabre Apki
Khabre Apki covers all Breaking News in Hindi

Most Popular