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कानून से बड़ा कोई नहीं क्या ये हकीकत है या महज एक दिखावा ? रंजीत राज

जगदीशपुर नगर पंचायत के पार्षद रहे रंजीत राज ने कहा कि यह विडंबना नही हकीकत है कि अब भ्रष्टाचार एवं आर्थिक अपराध का रायता फैल चुका है। उसे समेटना सरकार के बस की बात नहीं है! विडंबना यह है कि बिहार सरकार की नीतियों एवं कानूनों के विपरीत कार्य करके भी भोजपुर जिले का नगर पंचायत जगदीशपुर विकास का दावा करती है।

रंजीत राज ने कहा कि इनके विकास में नगर के विकास की अपेक्षा नगर की विकास का ढिंढोरा पीटने वालों की कितनी प्रगति हुई है यह जगजाहिर है। सुशासन की सरकार से जाने जानेवाली बिहार सरकार एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के मुखिया हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं सरकार की नीतियों एवं कानूनों को अमलीजामा पहनाने वाले अधिकारीगण की उदासीनता कहे या अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही! जिसके कारण नगर पंचायत जगदीशपुर भोजपुर के पदाधिकारियों ने अपनी इच्छा पूर्ति एवं स्वार्थसिद्धि हेतु 10 से 15 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता एवं कानून का उल्लंघन कर हेराफेरी के तहत अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली है।

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रंजीत राज ने कहा कि ऐसा नहीं है कि स्थानीय अधिकारियों से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों को इन सभी हेराफेरी की तथ्यों के साथ जानकारी नहीं है। परंतु अनियमितता एवं हेराफेरी के तहत उगाही गई करोड़ों रुपयें की राशि के प्रभाव के कारण ही किसी भी स्थानीय उच्च अधिकारियों ने कारवाई करने के बात तो दूर इस पर लगाये गए साक्ष्यों के आरोप में सच्चाई जानने को उचित ही नहीं समझा। जिसके कारण नगर पंचायत जगदीशपुर में सरकार की नीतियों के खिलाफ समानांतर कार्य होते रहे एवं भ्रष्टाचार के तहत राशि गबन अभिराम गति से अपनी प्रगति की सीढ़ियां चढ़ते हुए सुशासन को मुंह चिढ़ाता रहा है।

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रंजीत राज ने कहा कि नगर पंचायत जगदीशपुर में किस तरह की गड़बड़ी है ये एक योजना से सच्चाई पता चल जाएगी।ये योजना है सदर बाजार के मुख्य आर०सी०सी नाला निर्माण में तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी विजय नारायण पाठक, मुख्य पार्षद मुकेश कुमार गुड्डू, कनीय अभियंता एवं संवेदक विद्यासागर गुप्ता ने आपसी षड्यंत्र एवं फर्जीवाड़ा के तहत कार्य कराने के पूर्व ही एम०बी०( मेजरमेंट बुक) कर के राशि निकासी कर ली। इसके बाद आम नागरिक एवं शिकायतकर्ता तथा पदाधिकारियों को गुमराह करने के लिए मिथ्या साथियों का स्वांग भी रचा है। ताकि भविष्य में इस गड़बड़ी को शिकायत होने के उपरांत झूठे अभिलेखों के सहारे भ्रष्टाचारियों को बचाया जा सके। इसी तरह के सैकड़ों गड़बड़ियों की एक काव्य है।

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