Anand Bihari Shastri: नगर पंचायत शाहपुर के मिश्रवलिया मोड़ के समीप आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के प्रथम दिन शनिवार को श्री आनंद बिहारी शास्त्री जी महाराज के द्वारा राम कथा से शुरुआत की गई।
- हाइलाइट्स:Anand Bihari Shastri
- रामचरित मानस के श्रवण मात्र से समस्त पापों का नाश हो जाता है: आनंद बिहारी शास्त्री
- कहा: श्री रामचरित मानस के पाठ का एक शब्द भी यदि कान में पड़ जाए, तो पाप नष्ट हो जाते हैं
Anand Bihari Shastri आरा/शाहपुर: नगर पंचायत शाहपुर के मिश्रवलिया मोड़ के समीप आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के प्रथम दिन शनिवार को श्री आनंद बिहारी शास्त्री जी महाराज के द्वारा राम कथा से शुरुआत की गई। श्री आनंद बिहारी शास्त्री जी के द्वारा श्री रामचरित मानस पाठ के महत्व पर प्रकाश डाला गया। शास्त्री जी ने इसे एक ऐसा सत्संग बताया, जिसके श्रवण मात्र से ही समस्त पापों का नाश हो जाता है।
शास्त्री जी के अनुसार, श्री रामचरित मानस का श्रवण न केवल भक्ति का मार्ग है, अपितु पापों का भी विनाशक है। यह भक्ति साहित्य का अद्वितीय रत्न है। यह न केवल एक महाकाव्य है, अपितु जीवन के नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक ज्ञान का सार भी है। इस ग्रंथ की महिमा अपरम्पार है, और यह माना जाता है कि श्री रामचरित मानस के पाठ का एक शब्द भी यदि कान में पड़ जाए, तो पाप नष्ट हो जाते हैं।
राम नाम की शक्ति स्वयं में अद्भुत है। यह नाम स्मरण मात्र से ही व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिल सकती है। ऐसे में, रामकथा से परिपूर्ण श्री रामचरित मानस के एक शब्द का श्रवण भी आत्मा को शुद्ध करने और पापों से मुक्ति दिलाने में सक्षम है। श्री राम और माता सीता के जीवन की कथाओं का वर्णन करते हुए, उन्होंने रावण के अहंकार के विनाश की भी चर्चा की।
रावण, लंका का शक्तिशाली राजा, अपनी असाधारण शक्ति और विद्वत्ता के गर्व से अंधा था। उसे अपने बल और तपस्या पर अटूट विश्वास था, जिसके कारण वह देवताओं और ऋषियों को भी तुच्छ समझने लगा था। उसका दंभ इतना प्रबल था कि उसने नीति और धर्म की सीमाओं का भी उल्लंघन किया, जो उसके विनाश का कारण बना।
भगवान राम, जो धर्म और मर्यादा के प्रतीक थे, उन्होंने अपने अटूट साहस, धैर्य और न्याय के बल पर रावण के अहंकार को तोड़ने के साथ ही धर्म की स्थापना की। अहंकार और दंभ विनाशकारी होते हैं। भगवान श्री राम ने रावण के दंभ को तोड़कर यह संदेश दिया कि अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म के आगे हार जाता है।
पूज्य संत जीयर स्वामी जी महाराज के सनिध्य में आयोजित यज्ञ के माध्यम से शाहपुर में भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, यज्ञस्थल पर बने विशाल कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालु एकत्रित होकर कथा श्रवण कर रहे हैं। और कथा का आनंद ले रहे थे। यज्ञ मंडप को दुधिया रोशनी से सजाया गया है। वही वरीय पत्रकार संजय ओझा, दिलीप ओझा,विकास पांडेय, मिथलेश सिन्हा उर्फ बुलेट, कृष्णा जी, पिंटू जी, बाल्मीकि पांडे जी के सामूहिक प्रयासों के फलस्वरूप महायज्ञ के कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार और जन-जन तक जानकारी पहुंचाई जा रही है।
यज्ञ समिति के अध्यक्ष विजय सिंह के कुशल नेतृत्व में, उपाध्यक्ष शारदानंद सिंह उर्फ गुडु यादव, कोषाध्यक्ष सतदेव पांडेय और सचिव शिवप्रसन यादव का योगदान सराहनीय है। महायज्ञ कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए यज्ञ समिति के सदस्य संजय चतुर्वेदी, राकेश यादव , प्रदूमन पांडेय, मनीष यादव अजाद गुप्ता, धन पांडेय, दीपक पांडेय, मुन्ना यादव, संटू यादव, बंटी पांडेय, तेजु पांडेय, मुनमुन राय, निशु राय सहित अन्य सदस्य अविराम परिश्रम कर रहे है।