Shahpur Diara: घर बह गए, चूल्हे बुझ गए, खेत बर्बाद हुए और रोजगार ठप; तटबंधों पर शरण लिए सैकड़ों परिवारों के सामने भोजन व आश्रय का संकट
- हाइलाइट: Shahpur Diara
- बाढ़ का पानी उतरा, लेकिन संकट बरकरार; सामुदायिक रसोई बंद होने से विस्थापितों की चिंता बढ़ी
शाहपुर/आरा। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन दियारा क्षेत्र के विस्थापित परिवारों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए संचालित सामुदायिक रसोइयों को रविवार शाम से बंद करने का निर्देश दिया गया है। इस निर्णय के बाद तटबंधों पर शरण लिए सैकड़ों परिवारों के सामने भोजन और रहने का संकट गहरा गया है।
बाढ़ के तेज बहाव में कई कच्चे मकान और झोपड़ीनुमा घर या तो बह गए या पूरी तरह जमींदोज हो गए। पानी उतरने के बाद भी इन परिवारों के लिए घर लौटना संभव नहीं है। घरों के आसपास कीचड़ का अंबार लगा हुआ है, जबकि कई जगहों पर अब भी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है।
Shahpur Diara : बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के साथ तटबंधों पर शरण
जवइनिया, गंगापुर, नंदपुर, भुसहुला और दामोदरपुर के सैकड़ों परिवार अपने बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के साथ तटबंधों पर शरण लिए हुए हैं। विस्थापितों का कहना है कि बाढ़ के कारण खेतों में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और रोजगार के साधन भी ठप हैं। ऐसे में सामुदायिक रसोई बंद होने से उनके सामने रोजमर्रा के भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा।

दामोदरपुर-जवइनिया बांध पर शरण लिए 80 वर्षीय नन्हक यादव ने कहा, “पहिले साहब लोग हमनी के स्थिति देख लीं, तब रसोई बंद करीं।” वहीं परनीत बिंद, प्रेम बिंद और सुनीता बिंद ने कहा कि उनका घर बाढ़ में बह गया है और उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। बच्चों के साथ भोजन और आश्रय की व्यवस्था को लेकर वे बेहद चिंतित हैं।
विस्थापित परिवारों ने बताया कि सोमवार को तीज पर्व है, लेकिन उनके लिए त्योहार मनाना तो दूर, दो वक्त के भोजन की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि अभी उन्हें आगे का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
राजस्व कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें ऊपर से रविवार शाम से सभी सामुदायिक रसोइयों को बंद करने का निर्देश मिला है। हालांकि, अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि दामोदरपुर और जवइनिया क्षेत्र का निरीक्षण किया जा रहा है। इन दोनों स्थानों की स्थिति का जायजा लेने के बाद सामुदायिक रसोई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अन्य स्थानों की सामुदायिक रसोइयों को बंद किया जाएगा।
इधर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नावों का परिचालन भी सीमित हो गया है। फिलहाल आठ से दस नावों का ही संचालन किया जा रहा है। इससे विस्थापित परिवारों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है।

