Sunday, November 27, 2022
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ईंट के मकान से जलने से बच गया पूरा नया खवासपुर गांव

The brick house saved the entire village from burning

अगलगीः

बिहार।आरा। नया खवासपुर में आग लगने से झोपड़ीनुमा करीब 40 घर जल गये। लेकिन ईंट से बने मकान ने पूरे गांव को जलने से बचा लिया। गांव के पूरब दिशा में स्थित रामजी बिंद के घर से उठी चिंगारी तेज हवा के कारण विकराल हो पूरे गांव की ओर बढ़ रही थी। इस क्रम में एक-एककर करीब 40 घर आग की चपेट में आ गये। ग्रामीणों के प्रयास के बावजूद आग की लपटें बढ़ती ही जा रही थी। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर कैसे बुझायी जाये। लेकिन इन झोपड़ियों के बाद ईंट के मकान होने के कारण आग की लपटें थम गयी। ग्रामीणों ने आग को बढ़ने से रोकने के लिए रामानंद बिंद, गोबरी बिंद, बलेश्वर चौधरी, मनोज चौधरी व मंजी चौधरी का बना हुआ मड़ईनुमा ईंट के मकान के छप्पर व फूस के बनी दीवाल को खींचकर अलग किया। इससे आग आगे नहीं बढ़ सका। वरना पूरा गांव जल गया होता। इस अग्निकांड में करीब 40 घरों में अनाज, पलंग, चौकी, बिछावन, बर्तन, बक्से, साइकिल, गैस सिलेंडर चूल्हा किताब-कॉपी, सर्टिफिकेट, पैसे व आभूषण सहित सब कुछ जलकर स्वाहा हो गया। कृष्णागढ़ थाना प्रभारी सुरेश सिंह अपने दल बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच लोगों का उत्साह बढ़ाते रहे और आग बुझाने में जुटे रहे। इस मौके पर अग्निशमन दल के एसआई शशि भूषण सिंह, कांस्टेबल अजीत कुमार, सुनील कुमार, विनय कुमार, बृजेश कुमार, बलुआ पंचायत के मुखिया रामजी पांडेय, पंचायत पैक्स अध्यक्ष सुगंधी पांडेय, पीपरपांती निवासी मुन्ना सिंह, हरिराम सिंह, विष्णु पांडेय व अन्य गांव के लोग भी मौजूद रहे और आग बुझाने में मदद करते रहे।

The brick house saved the entire village from burning

जल गया, अब कैसे होगी मुनिया की शादी

आरा। आग ने नया खवासपुर गांव के करीब 40 परिवार के पूरी तरह उजाड़ दिया। आशियाने के साथ इनके सारे अरमान भी जल गये। इससे पीड़ितों का बुरा हाल हो गया है। देवेंद्र बिंद ने बताया कि 24 मई को बच्ची रोशनी की शादी होने वाली है। लेकिन आग ने तो सबकुछ छीन लिया। अब मुनिया की शादी कैसे होगी। त्रिलोकी बिंद की हालत भी कुछ ऐसी ही है। उनके बेटे धर्मेंद्र कुमार की शादी 12 मई को होने वाली है। अब इन लोगों के घर में कुछ भी खाने पीने रहने का सामग्री नहीं बचा। पीड़ित लोगों ने बताया कि कोविड-19 के कारण लॉक डाउन हुआ। इसके कारण उन लोगों को पहले ही रोजी-रोटी का दंश झेलना ही पड़ रहा था। रही-सही कसर आग ने पूरी कर दी। उन लोगों का परिवार दाना दाना के लिए मोहताज हो गया है।

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अगलगी से पीड़ित लोग

आरा। बैजू बिंद, शिव भजन बिंद, वीर बहादुर बिंद, जीयुत बिंद, देवेंद्र बिंद, रामजी बिंद, हृदया बिंद, रामानुज बिंद, हरेंद्र चौधरी, राजू बिंद, रामरूप बिंद, हीरालाल बिंद, रामनेह बिंद, राम स्वरूप बिंद, त्रिलोकी चौधरी, सीपत बिंद, अखिलेश बिंद, कमलेश बिंद, शिव जतन बिंद, वीरेंद्र बिंद, सुरेंद्र बिंद, ललन बिंद, सुशील बिंद, सूरज बिंद, सोनपाती कुंवर, अशोक बिंद, रामपत बिंद, पंकज बिंद व विकास बिंद सहित अन्य लोगों का घर जलकर स्वाहा हो गया।

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