Historic well of Harigaon: हरिगाँव पहुंचे जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने ऐतिहासिक कुएँ के इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए, प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।
- हाइलाइट: Historic well of Harigaon
- मॉरीशस के प्रधानमंत्री के पैतृक गांव का ऐतिहासिक कुआँ
- भारत और मॉरीशस के बीच एक जीवंत संबंध का प्रतीक है
खबरे आपकी: बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड में स्थित हरिगाँव, अपनी शांत ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद एक अद्वितीय ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह गाँव केवल एक सामान्य ग्राम नहीं, बल्कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री का पैतृक गाँव होने का गौरव प्राप्त करता है। इस गाँव में स्थित एक प्राचीन कुआँ, जिसकी ऐतिहासिक महत्ता एक शिलापट्ट पर अंकित है, इस बात का पुख्ता प्रमाण है।
इस प्राचीन कुएँ पर लगा शिलापट्ट स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री का पैतृक संबंध इसी हरिगाँव से है। यह कुआँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि भारत और मॉरीशस के बीच एक सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक भी है। इसकी ऐतिहासिक गरिमा को समझते हुए, बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार स्वयं इस स्थल का दौरा कर चुके हैं, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। यह कुआँ न केवल स्थानीय इतिहास का हिस्सा है, बल्कि यह प्रवासी भारतीयों के संघर्ष और उनकी जड़ों से जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कहानी भी कहता है।
दुर्भाग्यवश, अपनी तमाम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के बावजूद, यह प्राचीन कुआँ वर्तमान में घोर बदहाली का शिकार है। देखरेख के अभाव में इसकी संरचना जर्जर हो चुकी है, और यह पूरी तरह से उपेक्षित स्थिति में है। प्रशासनिक उदासीनता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, जिसके कारण यह महत्वपूर्ण धरोहर धीरे-धीरे अपनी पहचान खोने की कगार पर है। कुएँ के आसपास काफी गंदगी हैं, जो इसकी दयनीय स्थिति को और भी उजागर करती हैं।
Historic well of Harigaon: पूर्व विधायक ने की चिंता व्यक्त, संरक्षण की मांग
जनसंपर्क के दौरान हरिगाँव पहुंचे जगदीशपुर के पूर्व विधायक भाई दिनेश ने ऐतिहासिक कुएँ के इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए, प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक कुएँ के शीघ्र जीर्णोद्धार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है। उनका मानना है कि ऐसी महत्वपूर्ण विरासत स्थलों का संरक्षण न केवल स्थानीय पहचान के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों और इतिहास से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
हरिगाँव का यह प्राचीन कुआँ केवल एक ढाँचा नहीं, बल्कि भारत और मॉरीशस के बीच एक जीवंत संबंध का प्रतीक है। इसकी बदहाली न केवल एक ऐतिहासिक स्थल का नुकसान है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक लापरवाही को भी दर्शाता है। यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस धरोहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं और इसके तत्काल जीर्णोद्धार एवं संरक्षण हेतु ठोस कदम उठाएं, ताकि इसकी गरिमा पुनः स्थापित हो सके और यह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहे।


