Nitish Kumar to Resign: बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक पड़ाव: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विधान परिषद से इस्तीफा और राज्यसभा की ओर प्रस्थान
- हाइलाइट: Nitish Kumar to Resign
- नीतीश कुमार का विधान परिषद छोड़ना राज्य की राजनीति के एक युग का समापन
पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट अब धरातल पर उतरने वाली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। साल 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे नीतीश कुमार के लिए यह एक भावुक लेकिन रणनीतिक निर्णय है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7 मई 2024 को चौथी बार विधान परिषद की सदस्यता ग्रहण की थी। नियमानुसार उनका यह कार्यकाल मई 2030 तक चलने वाला था, लेकिन इसी बीच 16 मार्च 2026 को उनके राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब उन्होंने राज्य के इस सदन को अलविदा कहने का मन बना लिया है। 10 अप्रैल को वह आधिकारिक तौर पर राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं।
Nitish Kumar to Resign – संसदीय यात्रा के विभिन्न आयाम
इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड जुड़ गया है, जो बहुत कम राजनेताओं के नसीब में होता है। वह अब भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों—विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और राज्यसभा—का सदस्य बनने वाले नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं। उनके संसदीय सफर की शुरुआत 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से हुई थी, जब वह पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1989 में उन्होंने 9वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में केंद्र की राजनीति में कदम रखा। अब पहली बार वह ‘उच्च सदन’ यानी राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
रणनीतिक विमर्श और शीर्ष नेताओं की उपस्थिति
इस्तीफे की इस औपचारिक प्रक्रिया से पहले रविवार की शाम मुख्यमंत्री आवास पर राजनीतिक हलचल काफी तेज रही। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के तमाम कद्दावर नेता मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। इन नेताओं में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी और ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी जैसे करीबी नाम शामिल थे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान आगे की रणनीतियों और पार्टी के भविष्य के कदमों पर विस्तृत चर्चा हुई है।
नीतीश कुमार का विधान परिषद छोड़ना राज्य की राजनीति के एक युग का समापन और राष्ट्रीय राजनीति के मंच पर एक नई पारी की शुरुआत माना जा रहा है। उनके अनुभव और कार्यशैली का लाभ अब सीधे तौर पर राज्यसभा को मिलेगा, जिसकी तैयारी मुख्यमंत्री ने पूरी कर ली है।


