Land Registration Bihar: राज्य सरकार के राजस्व एवं निबंधन विभाग ने जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक नई व्यवस्था तैयार कर ली है।
- हाइलाइट: Land Registration Bihar
- भू-स्वामियों और खरीदारों के बीच भरोसे के एक नए युग की शुरुआत
- जमीन के दस्तावेजों की सटीक जांच और सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी
- डिजिटल व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम, खरीदारों के लिए एक सुरक्षा कवच
पटना। बिहार में जमीन खरीदने वाले नागरिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार के राजस्व एवं निबंधन विभाग ने जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक नई व्यवस्था तैयार कर ली है। अब जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले खरीदारों को उस भूमि से जुड़ी सभी प्रासंगिक जानकारियां उपलब्ध होंगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य भूमि विवादों को कम करना और धोखाधड़ी की संभावनाओं को शून्य करना है।
सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान और जीवन आसान की संकल्पना को साकार करते हुए, सरकार ने दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से लैस करने का निर्णय लिया है। इसी महीने से यह नई प्रणाली पूरे राज्य में लागू होने जा रही है, जिसकी सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राज्य के सभी अंचलाधिकारियों को इस संबंध में गहन प्रशिक्षण दिया जा चुका है और जमीन निबंधन के लिए विशेष मोबाइल यूनिट भी तैयार कर ली गई है। उम्मीद है कि इस सप्ताह के अंत तक या इस माह के समापन तक यह पूरी प्रक्रिया राज्य भर के निबंधन कार्यालयों में प्रभावी हो जाएगी।
Land Registration Bihar: जमीन के सौदे के समय देनी हैं ये जानकारियां
नई व्यवस्था के तहत जमीन के सौदे को पारदर्शी बनाने के लिए आवेदकों को निबंधन पोर्टल पर 13 प्रकार की विशिष्ट जानकारियां दर्ज करनी होंगी। इस प्रक्रिया के लागू होने के बाद खरीदारों को केवल विक्रेता के भरोसे रहने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि सरकारी डेटाबेस के माध्यम से वे स्वयं भूमि की स्थिति की पुष्टि कर सकेंगे। पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली जानकारियों में मुख्य रूप से जमीन का खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी और विक्रेता का पूरा विवरण शामिल है।
अंचलाधिकारी (सीओ) करेंगे जांच
इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अंचल अधिकारी की भूमिका होगी। जैसे ही आवेदक पोर्टल पर अपने दस्तावेज अपलोड करेंगे, अंचल अधिकारी द्वारा उन दस्तावेजों और विक्रेता के दावों की गहन जांच की जाएगी। सरकार ने इस कार्य के लिए एक निश्चित समय सीमा भी तय की है, जिसके तहत सीओ को अधिकतम 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह जवाबदेही न केवल प्रक्रिया में तेजी लाएगी, बल्कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक भी लगाएगी।
नई व्यवस्था का क्या फायदा?
इस नई व्यवस्था के बहुआयामी लाभ होंगे। सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि भूमि खरीद-बिक्री में व्याप्त अनिश्चितता का अंत होगा। अक्सर देखा जाता है कि रजिस्ट्री के बाद खरीदारों को पता चलता है कि खरीदी गई जमीन पर कोई पूर्व विवाद है, उस पर लोन बकाया है या वह किसी अन्य कारण से कानूनी दांव-पेच में फंसी है। नई प्रणाली के माध्यम से रजिस्ट्री से पूर्व ही इन सभी तथ्यों का खुलासा हो जाएगा, जिससे खरीदार का निवेश सुरक्षित रहेगा और अदालती मामलों में कमी आएगी।


