HomeNewsबिहारभोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर पर बोले ADG, गंभीर चूक

भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर पर बोले ADG, गंभीर चूक

ADG Sudhanshu Kumar: बिहार पुलिस मुख्यालय ने भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस स्तर पर गंभीर चूक स्वीकार की है। एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि इस लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई की गई है।

  • हाइलाइट: ADG Sudhanshu Kumar
  • पुलिस मुख्यालय ने भरत तिवारी एनकाउंटर में गंभीर चूक स्वीकार की।
  • SHO समेत चार पुलिसकर्मी निलंबित, DIG को जांच की जिम्मेदारी।
  • सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन।

आरा। बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस मुख्यालय ने पहली बार आधिकारिक रूप से यह स्वीकार किया है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस स्तर पर गंभीर चूक हुई थी।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने स्पष्ट किया कि 16 जून को जब पुलिस टीम आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मौके पर पहुंची, तब स्थिति को पेशेवर तरीके से संभालने में कमी रह गई। इस चूक को स्वीकार करते हुए विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है।

ADG Sudhanshu Kumar : लापरवाही बरतने के आरोप में हुई कार्रवाई

लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित थानेदार, दो दारोगा, एक सहायक अवर निरीक्षक और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, इस पूरे प्रकरण की निगरानी और गहन पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी को सौंप दी गई है, साथ ही फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) और अन्य वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया भी जारी है।

सरकार ने किया है न्यायिक जांच आयोग का गठन

मामले की संवेदनशीलता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में यह आयोग गठित किया गया है, जो पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि चूँकि मामला अब एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग के विचाराधीन है, इसलिए किसी भी प्रकार की विस्तृत टिप्पणी से बचना ही उचित होगा।

एनकाउंटर कभी उपलब्धि नहीं हो सकता

इस घटनाक्रम पर एडीजी सुधांशु कुमार ने एनकाउंटर को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी एनकाउंटर को पुलिस की उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कानून के अनुसार, आत्मरक्षा में बल प्रयोग का अधिकार तभी है जब पुलिसकर्मियों के जीवन पर तत्काल और गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाए। हालांकि, उन्होंने यह दोहराया कि ऐसी हर मुठभेड़ की विस्तृत जांच अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी दायरे के भीतर रही है।

सियासी घमासान के केंद्र में मामला

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला वर्तमान में बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है। विपक्ष जहां इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमलावर है और इसे फर्जी मुठभेड़ करार दे रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के भीतर से भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी है। प्रशासन द्वारा न्यायिक आयोग के गठन के बाद अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला भविष्य में पुलिसिंग के तौर-तरीकों और जवाबदेही तय करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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