Jagdishpur Fort Tazias : नगर के विभिन्न मोहल्लों से निकली 26 भव्य और आकर्षक ताजियां जब ऐतिहासिक बाबू वीर कुंवर सिंह किला मैदान पहुंचीं, तो वहां का नजारा देखते ही बनता था।
- हाइलाइट:Jagdishpur Fort Tazias
- तीन हिंदू परिवारों की सदियों पुरानी परंपरा, गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल
- अपने वतन की मिट्टी से जुड़े सऊदी, दुबई, कतर और शाहजहां से भी पहुंचे लोग
- ताजियों के दीदार के लिए किला मैदान में हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा
आरा। भोजपुर जिले का जगदीशपुर नगर पंचायत शुक्रवार को मोहर्रम के मौके पर आस्था, परंपरा और आपसी भाईचारे के खूबसूरत रंगों में रंगा नजर आया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द का एक ऐसा उदाहरण बन गया जिसने दूर-दराज के लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित किया। नगर के विभिन्न मोहल्लों से निकली 26 भव्य और आकर्षक ताजियां जब ऐतिहासिक बाबू वीर कुंवर सिंह किला मैदान पहुंचीं, तो वहां का नजारा देखते ही बनता था। इन ताजियों के दीदार के लिए किला मैदान में हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
Jagdishpur Fort Tazias: अपने वतन की मिट्टी से जुड़े लोग भी पहुंचे जगदीशपुर
इस आयोजन की खासियत यह रही कि इसमें शामिल होने के लिए लोग देश की सीमाओं से बाहर से भी पहुंचे। सऊदी अरब, दुबई, कतर और शाहजहां जैसे देशों में बसे जगदीशपुर के लोग खास तौर पर इस परंपरा का हिस्सा बनने और अपने वतन की मिट्टी से जुड़े इस आयोजन को देखने के लिए यहां आए। ताजियों की कलात्मक सजावट और उनकी बनावट ने हर किसी का मन मोह लिया। विशेष रूप से ख्वाजा मोहल्ला के मोतियों वाले ताजिए ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा, जिसके साथ सेल्फी लेने और उसे कैमरे में कैद करने के लिए युवाओं की भारी भीड़ देखी गई।
तीन हिंदू परिवारों द्वारा निभाई जा रही सदियों पुरानी परंपरा
इस आयोजन की एक और बड़ी विशेषता तीन हिंदू परिवारों द्वारा निभाई जा रही सदियों पुरानी परंपरा है। ये परिवार न केवल इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की उस मिसाल को कायम रखे हुए हैं, जो जगदीशपुर की पहचान बन गई है। मोहर्रम के मौके पर जिस तरह से पूरा नगर एक साथ खड़ा नजर आया, वह सांप्रदायिक सौहार्द का एक मजबूत संदेश देता है। पूरे दिन किला मैदान में गहमागहमी रही और सुरक्षा के साथ-साथ व्यवस्था भी दुरुस्त देखी गई।




