Bankipur: आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा से जुड़े एक व्यक्ति ने उन्हीं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया?
- हाइलाइट: Bankipur
- कंधे पर माइक और PK के खिलाफ ‘जहर’! बांकीपुर में क्यों घूम रहे पुरुषोत्तम कुमार?
Bankipur: पटना की सड़कों पर आजकल एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। बांकीपुर की गलियों में एक शख्स हाथ में पोर्टेबल माइक और कंधे पर स्पीकर टांगे घूम रहा है। उसके हाथों में कुछ कागजात हैं, जो शायद किसी बड़े वादे के सबूत हैं। यह शख्स है पुरुषोत्तम कुमार, जो बख्तियारपुर का रहने वाला है और आज पूरे दमखम के साथ प्रशांत किशोर के खिलाफ मैदान में उतरा है। पुरुषोत्तम की एक ही रट है, प्रशांत किशोर पर भरोसा मत कीजिए, ये सिर्फ जुमलों का खेल है।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा से जुड़े एक व्यक्ति ने उन्हीं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया? पुरुषोत्तम का आरोप है कि उन्हें प्रशांत किशोर ने टिकट का आश्वासन दिया था, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्हें किनारे कर दिया गया। पुरुषोत्तम का दावा है कि उन्होंने न केवल जन सुराज के लिए 21,000 रुपये का चंदा दिया, बल्कि कार्यक्रमों की भीड़ जुटाने और प्रचार प्रसार में 15 से 20 लाख रुपये तक खर्च किए। उनका कहना है कि जो संगठन ‘जमीन पर काम करने वाले को टिकट’ देने का दावा करता था, उसी ने पैसे लेकर टिकट बेच दिया।
Bankipur : पुरुषोत्तम का यह कहना कि पीके के बोल कुछ और हैं और काम कुछ और।
पुरुषोत्तम अब बांकीपुर की गलियों में घूम-घूमकर प्रशांत किशोर को ‘फ्रॉड’ कह रहे हैं। उनका कहना है कि पीके के बोल कुछ और हैं और काम कुछ और। वे आरोप लगाते हैं कि प्रशांत किशोर ने पहले राघोपुर से चुनाव लड़ने का वादा किया था, लेकिन वहां से वे पीछे हट गए। अब वे बांकीपुर में आकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। पुरुषोत्तम की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि प्रशांत किशोर बांकीपुर की जनता पर यह आरोप लगा रहे हैं कि वे 10,000 रुपये में वोट बेच देते हैं। पुरुषोत्तम का सीधा सवाल है कि जो खुद करोड़ों में टिकट बेच रहा है, वह जनता को गाली देने का हक कैसे रखता है?
पुरुषोत्तम का यह भी मानना है कि प्रशांत किशोर को अपने गृह क्षेत्र यानी रोहतास या बक्सर की ओर रुख करना चाहिए। उनका तर्क है कि बांकीपुर में केवल यहां का स्थानीय बेटा या बेटी ही चुनाव जीतना चाहिए। पुरुषोत्तम ने अपनी मुहिम को और धार देने के लिए 28 तारीख तक घर-घर जाकर पीके की कथित पोल खोलने का संकल्प लिया है। उनके पास अपनी कही बातों को साबित करने के लिए चंदे की रसीद और खर्चों का ब्योरा भी है।
राजनीति में जब उम्मीदें टूटती हैं, तो …
हालांकि, सड़क पर उनकी इस मुहिम का असर हर जगह एक जैसा नहीं है। राह चलते कई लोग उन्हें रुककर सुनते हैं, तो कई उन्हें नजरअंदाज कर आगे निकल जाते हैं। कुछ लोग तो उन्हें सलाह भी देते हैं कि इस तरह की नारेबाजी में समय बर्बाद करने के बजाय कोई काम-धंधा कर लेना चाहिए। लेकिन पुरुषोत्तम पर इन बातों का कोई असर नहीं है। वे पूरी शिद्दत के साथ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे जन सुराज के इस ‘गद्दारी’ वाले मॉडल को समझें।
राजनीति में जब उम्मीदें टूटती हैं, तो उनका प्रकटीकरण कितना तीखा हो सकता है, पुरुषोत्तम कुमार का यह संघर्ष बताता है। क्या पुरुषोत्तम की यह आवाज बांकीपुर की जनता के बीच कोई बदलाव लाएगी? क्या वाकई कोई इस मुहिम से प्रभावित होगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि चुनाव से पहले प्रशांत किशोर के खिलाफ उठी यह आवाज राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय जरूर बन गई है। फिलहाल, बांकीपुर की गलियों में पीके के खिलाफ यह अभियान जारी है।

