Homeबिहारआराआरा सदर अस्पताल की ICU: करोड़ों की मशीनें, फिर भी मरीज़ बेहाल

आरा सदर अस्पताल की ICU: करोड़ों की मशीनें, फिर भी मरीज़ बेहाल

Ara Sadar Hospital ICU: पूर्व विधायक मनोज मंजिल ने इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। कहा की इस अकार्यशील ICU के कारण प्रतिदिन दर्जनों मरीजों को सदर अस्पताल से रेफर किया जाता है।

  • हाइलाइट: Ara Sadar Hospital ICU
    • आरा सदर अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई: करोड़ों की मशीनें, फिर भी मरीज़ बेहाल

आरा, बिहार: भोजपुर जिले के सदर अस्पताल, आरा में स्थापित गहन चिकित्सा इकाई (ICU) करोड़ों रुपये के अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होने के बावजूद वर्षों से अकार्यशील है। इसका मुख्य कारण आवश्यक चिकित्साकर्मियों और सहायक कर्मचारियों की घोर कमी है। यह गंभीर स्थिति मरीजों के जीवन को खतरे में डाल रही है और उन्हें महंगी निजी स्वास्थ्य सेवाओं का सहारा लेने पर मजबूर कर रही है। ये बाते पूर्व विधायक मनोज मंजिल ने कही।

Ara Sadar Hospital ICU: पूर्व विधायक ने चिंता व्यक्त करते उठाये सवाल

पूर्व विधायक मनोज मंजिल ने इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के समय से ही उन्होंने इस विषय को विधानसभा सत्रों में और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के समक्ष जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में कई बार उठाया है। विगत लगभग पांच वर्षों से वे इस अहम सवाल को लगातार उठा रहे हैं, परंतु अभी तक सदर अस्पताल का ICU पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है।

इस अकार्यशील ICU के कारण प्रतिदिन दर्जनों मरीजों को सदर अस्पताल से रेफर किया जाता है। इनमें से कई मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में सरकारी उच्च केंद्रों जैसे पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, एम्स या एनएमसीएच, पटना का रुख करते हैं। वहीं, बड़ी संख्या में मरीज आरा या पटना के निजी अस्पतालों में महंगे इलाज का शिकार होते हैं।

अक्सर देखा जाता है कि जब मरीजों की स्थिति और बिगड़ जाती है और उनका पैसा भी खत्म हो जाता है, तब उन्हें सरकारी उच्च केंद्रों में रेफर किया जाता है। ऐसे में कई बार उन्हें इमरजेंसी में बेड नहीं मिल पाता, जिससे वे बिना समुचित इलाज के ही मौत के मुंह में चले जाते हैं। दलालों के चंगुल में फंसने पर मरीज धन और जान दोनों गँवा बैठते हैं।

पूर्व विधायक मंजिल ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई निजी अस्पतालों में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और चिकित्सा उपकरणों से अधिक दलाल सक्रिय रहते हैं। इन दलालों को तब अवसर मिलता है जब सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी, समुचित इलाज का अभाव, या मैनपावर की कमी के कारण जानलेवा लापरवाही बरती जाती है।

पूर्व विधायक ने कहा कि इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स (IPHS) के मानकों के अनुसार, सभी सदर अस्पतालों में एक कार्यशील गहन चिकित्सा इकाई का होना अनिवार्य है। इसके बावजूद, आरा सदर अस्पताल और बिहार के लगभग सभी सदर अस्पतालों में ICU अभी भी पूरी तरह से क्रियाशील नहीं हैं। यह स्थिति राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करती है और लाखों आम लोगों के स्वास्थ्य अधिकारों का उल्लंघन है।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।
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