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मोबाइल नंबर पोर्टिंग ठगी का न्या तरीका, साइबर पुलिस ने किया खुलासा

Cyber Fraud: भोजपुर में अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़: दो सगे भाई गिरफ्तार, 60 लाख की ठगी का खुलासा

jay kumar
  • हाइलाइट: Cyber Fraud
    • साइबर अपराध के विरुद्ध बड़ी सफलता
    • अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का भंडाफोड़

आरा। भोजपुर जिले की साइबर पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह यूपीआई एवं फोन कॉल के माध्यम से करीब 60 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दे चुका था। पुलिस ने इस मामले में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से नकदी सहित कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए गए हैं।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान नवादा जिले के हिसुआ थाना के मंझवे गांव निवासी विकास कुमार चौरसिया और विशाल कुमार चौरसिया के रूप में हुई है। ये दोनों भाई वर्तमान में पटना के रामकृष्णनगर मोहल्ले में मकान बनाकर रह रहे थे। साइबर थाना डीएसपी स्नेहू सेतू ने एक प्रेस वार्ता में इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपितों के पास से एक कार, 11 मोबाइल फोन, एक राउटर, एटीएम कार्ड, कई सिम कार्ड, एक लैपटॉप और ठगी की रकम में से एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

Cyber Fraud – ठगी का तरीका: मोबाइल नंबर पोर्टिंग का खेल

डीएसपी ने गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया कि ये अपराधी यूपीआई से जुड़े मोबाइल नंबरों को पोर्ट करके लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बना लेते थे और आसानी से रुपये उड़ा लेते थे। वे फर्जी अफसर बनकर एक दिन में सौ से डेढ़ सौ लोगों को फोन करते थे। अब तक विभिन्न लोगों के खातों से लगभग 60 लाख रुपये की ठगी की जा चुकी है। ठगी की रकम को तत्काल किसी निर्दोष व्यक्ति के खाते में मंगाकर निकाल लिया जाता था, जिससे पुलिस के लिए उन तक पहुंचना कठिन हो जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि नोएडा और दिल्ली में बैठे एजेंटों के जरिए किसी भी अनजान व्यक्ति का मोबाइल नंबर पोर्ट करा लिया जाता था। चूंकि अधिकांश लोगों के बैंक खाते मोबाइल नंबर से जुड़े होते हैं, इसलिए नंबर पोर्ट होते ही आरोपी खातों को हैक कर उनका दुरुपयोग करने लगते थे।

इस गिरोह की गतिविधियों को लेकर साइबर थाना को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी क्रम में आरा टाउन थाना क्षेत्र के अबरपुल निवासी सुबोध कुमार के खाते से साढ़े तीन लाख रुपये की अवैध निकासी की गई थी। सुबोध कुमार ने 9 सितंबर 2025 को आरा साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि निर्वाचन विभाग का फर्जी पदाधिकारी बनकर उनसे बीएलओ के कार्य की प्रगति के संबंध में पूछताछ की गई थी और फिर उनके नंबर पर ओटीपी भेजकर जानकारी ली गई, जिसके बाद उनके खाते से पैसे उड़ा लिए गए।

प्राथमिकी के आधार पर पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने विभिन्न बैंक खातों की गहन जांच-पड़ताल करते हुए इस अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंच बनाई। इसके बाद नवादा जिले के हिसुआ और नादरीगंज तथा पटना के रामकृष्णनगर इलाके में छापेमारी कर साइबर ठगी में संलिप्त दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

साइबर ठगी से अर्जित की संपत्ति

साइबर डीएसपी ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपितों ने साइबर ठगी से अर्जित रकम को पटना के रामकृष्णनगर स्थित अपने पांच तल्ले मकान के निर्माण में भी लगाया है। पूछताछ के दौरान उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि ठगी से मिले पैसों का निवेश मकान निर्माण में किया गया है। बताया गया है कि मकान की अनुमानित कीमत चार से पांच करोड़ रुपये से अधिक है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) और आयकर विभाग के माध्यम से इस संपत्ति की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

पुलिस नोएडा और दिल्ली में सक्रिय उन एजेंटों की पहचान में भी जुटी है, जिनके जरिए निर्दोष लोगों के मोबाइल नंबर पोर्ट कराकर साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। दरअसल, सिम कंपनियों को हर माह मोबाइल नंबर पोर्ट कराने का लक्ष्य दिया जाता है, और इसी की आड़ में सिम विक्रेताओं से मिलीभगत कर एजेंट आसानी से किसी अन्य व्यक्ति का मोबाइल नंबर पोर्ट करा लेते थे, जिससे इस तरह के अपराधों को बढ़ावा मिलता था।

Bijay singh
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