HomeNewsक्राइमभरत तिवारी को 5वीं गोली कब,किस स्थित में और किसने मारी?

भरत तिवारी को 5वीं गोली कब,किस स्थित में और किसने मारी?

Bharat encounter: क्या उन्हें गाड़ी में बैठाकर शाहपुर रेफरल अस्पताल से आरा सदर अस्पताल ले जाने के दौरान गोली मारी गई, या फिर आरा से पटना ले जाते समय उनके साथ यह घटना घटी?

  • हाइलाइट:
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा के बाद एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल
  • आखिर भरत भूषण तिवारी को अन्य गोलियां कब और किस स्थिति में मारी गईं?

आरा। जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी निवासी भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति काफी गंभीर और पेचीदा हो गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भरत भूषण तिवारी को कुल पांच गोलियां लगी थीं। इस रिपोर्ट ने घटनाक्रम से जुड़ी पुलिस की कार्यशैली और एनकाउंटर की परिस्थितियों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब अब हर किसी को चाहिए।

तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने मीडिया के सामने दिए बयान कि एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी को तीन गोलियां मारी गई थीं। हालांकि, घटना के बाद दर्ज एफआईआर में पूरी तरह अलग कहानी बयां की गई है। एफआईआर में एसटीएफ टीम के सिपाही अक्षय कुमार (JC-1149) के द्वारा आत्मरक्षा में अपने शस्त्र से चार चक्र गोलियां चलाने का उल्लेख किया गया है।

एफआईआर के अनुसार, गोली लगने से जख्मी होने के बाद भरत तिवारी के गिरते ही पुलिस ने उन्हें अभिरक्षा में लिया, वरीय अधिकारियों को सूचित किया और सरकारी वाहन से तुरंत इलाज के लिए रेफरल अस्पताल, शाहपुर ले गए। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद यह मामला और भी उलझ गया है।

भरत तिवारी के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पांच गोली मारने के खुलासे और पुलिस के दावों और मौके पर हुई कार्रवाई के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भरत तिवारी को अन्य गोलियां कब और किस स्थिति में मारी गईं? क्या उन्हें गाड़ी में बैठाकर शाहपुर रेफरल अस्पताल से आरा सदर अस्पताल ले जाने के दौरान गोली मारी गई, या फिर आरा से पटना ले जाते समय उनके साथ यह घटना घटी?

इन विसंगतियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। पुलिस द्वारा दी गई अलग-अलग जानकारी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्षों में जो अंतर दिख रहा है, उसने पूरे एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर संदेह के बादल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि सच्चाई कब तक सामने आती है।

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