Essentials of e-tendering: बिहार विधानसभा: छोटे कार्यों में ई-निविदा की अनिवार्यता पर विधायक गौतम कृष्ण ने जताई चिंता, नियमों में संशोधन की मांग
- हाइलाइट:
- पूर्व में 15 लाख रुपये तक की योजनाओं को विभागीय स्तर पर ही कार्यान्वित करने की अनुमति थी
- अब पुराने आदेश को रद्द कर दिया है और सभी कार्यों के लिए ई-निविदा को अनिवार्य बना दिया है
Essentials of e-tendering: बिहार विधानसभा के सत्र के दौरान विधायक गौतम कृष्ण ने नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी हालिया दिशा-निर्देशों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि विभाग द्वारा सभी कार्यों को अनिवार्य रूप से ई-निविदा के माध्यम से कराने के नए नियमों से छोटे स्तर के विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब होगा। विधायक ने तर्क दिया कि विभागीय स्तर पर होने वाले छोटे कार्य जल्दी संपन्न होते थे, जिससे जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हो पाती थीं।
बता दे कि नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से सभी संबंधित नगर निकायों और इकाइयों को इस नए निर्देश के बारे में सूचित कर दिया गया है। इससे पूर्व, विभाग ने जनहित और कार्यों की सुगमता को देखते हुए आदेश ज्ञापांक 4322, दिनांक 24.08.2023 के तहत 15 लाख रुपये तक की योजनाओं को विभागीय स्तर पर ही कार्यान्वित करने की अनुमति प्रदान की थी। हालांकि, अब उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है और सभी कार्यों के लिए ई-निविदा को अनिवार्य बना दिया है।
विधायक गौतम कृष्ण ने विधानसभा में अपनी बात रखते हुए कहा कि वार्ड स्तर या छोटे स्थानीय कार्यों के लिए यह प्रक्रिया लंबी और जटिल साबित होगी। विभागीय स्तर पर कार्य होने से प्रशासनिक तत्परता बनी रहती थी, जबकि ई-निविदा की प्रक्रिया में लगने वाला समय छोटे विकास कार्यों की गति को बाधित करेगा।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस नए निर्देश की पुनः समीक्षा की जाए। विधायक ने सुझाव दिया कि 15 लाख रुपये तक की योजनाओं के लिए पूर्व की व्यवस्था को बहाल किया जाना चाहिए अथवा नियमों में उचित संशोधन किया जाना चाहिए ताकि स्थानीय विकास कार्यों में कोई बाधा न आए और निर्धारित समय सीमा के भीतर जनोपयोगी कार्य पूर्ण किए जा सकें।


