NGO File Shahpur : उपमुख्य पार्षद झुनीया देवी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नगर पंचायत में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, पारदर्शिता का अभाव या मनमानी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- हाइलाइट: NGO File Shahpur
- नये एनजीओ नियुक्ति की फाइल गायब होना एक चिंताजनक संकेत: झुनीया देवी
आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर नगर पंचायत कार्यालय से एनजीओ की नियुक्ति, उनके नाम, पते और सेवा शर्तों से संबंधित अनुबंध की फाइल का गायब हो जाना कई सवाल खड़े करता है, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। शाहपुर का यह मामला नपं प्रशासन की कार्यप्रणाली में व्याप्त मनमानी की पोल खोलता नजर आ रहा है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब नगर पंचायत की उपमुख्य पार्षद झुनीया देवी ने जनहित में नगर की सफाई व्यवस्था और उससे जुड़े एनजीओ के अनुबंधों के अवलोकन हेतु आधिकारिक तौर पर दस्तावेज मांगे। एक जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें यह जानने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है कि नगर में कौन सी संस्था, किन शर्तों पर और किस आधार पर कार्य कर रही है। हालांकि, बार-बार मौखिक आग्रह के बावजूद कार्यालय द्वारा उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने में आनाकानी की गई।
NGO File Shahpur : एनजीओ की फाइल कनीय अभियंता के पास रखने का क्या औचित्य है?
स्थिति तब और अधिक चौंकाने वाली हो गई जब नगर कार्यालय के बड़ा बाबू द्वारा यह उत्तर दिया गया कि संबंधित फाइल कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, बल्कि कनीय अभियंता जयनंदन चौधरी के पास मौजूद है। यहां यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर कार्यालय की गोपनीय और महत्वपूर्ण फाइल, कार्यालय से बाहर निकाल कर कनीय अभियंता के पास रखने का क्या औचित्य है? कथित एनजीओ द्वारा कार्य शुरू करने के बाद इस फाइल का दफ्तर से बाहर जाना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और इस पूरी प्रक्रिया के पीछे की मंशा पर संदेह उत्पन्न करता है।
नए एनजीओ से संबंधित फाइलों को छिपाने का रहस्य क्या है?
उपमुख्य पार्षद झुनीया देवी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नगर पंचायत में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, पारदर्शिता का अभाव या मनमानी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और विभागीय आदेशों का हवाला देते हुए लिखित सूचना मांगी है। उनका कहना है कि एक जून 2026 से नए एनजीओ के कार्यभार संभालने की चर्चाएं तो हो रही हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति पूरी तरह से अस्पष्ट और संदिग्ध है। न तो किसी आधिकारिक पत्र के माध्यम से इसकी सूचना दी गई है और न ही नये एनजीओ की कार्यप्रणाली या सेवा शर्तों का आधिकारिक पत्र दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि जब सफाई कार्य पूर्व की भांति ही चल रहे हैं और कोई स्पष्ट बदलाव नजर नहीं आ रहा है, तो फिर नए एनजीओ से संबंधित फाइलों को छिपाने का रहस्य क्या है? क्या यह किसी बड़े वित्तीय अनियमितता को छिपाने का प्रयास है या फिर प्रशासनिक मिलीभगत का कोई बड़ा खेल?
उपमुख्य पार्षद ने इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा तत्काल प्रभाव से एनजीओ के सेवा शर्त संबंधी दस्तावेजों को उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे इस पूरे प्रकरण की शिकायत भोजपुर जिलाधिकारी और राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग के उच्च अधिकारियों से करेंगी।

