Kumar Abhishek NGO: भोजपुर जिला के नगर निकायों में कागजी खेल में माहिर एक कथित एनजीओ की बढ़ती पैठ: व्यवस्था पर उठते सवाल
- हाइलाइट: Kumar Abhishek NGO
- चर्चा में कुमार अभिषेख कथित एनजीओ
- नगर निकायों में बढ़ता दबदबा, उठते सवाल
- एनजीओ के पास बुनियादी संसाधन तक नहीं
- धरातल पर सफाई और अन्य व्यवस्था पूर्व के भाति
- लेकिन, पूरा श्रेय और प्रबंधन एनजीओ के खाते में
आरा। जिले के विभिन्न नगर निकायों में पैठ बढ़ा रहे एक सफाई एनजीओ की चर्चा खूब हो रही है। टेंडर मिलने की चर्चा, इसके कामकाज, अनुभव और व्यवस्था पर सवाल उठने शुरू हो गये है। तेजी से यह संस्था जिले के अन्य निकायों में अपनी पैठ बनाने में जुटी है। कथित अनुभव और संसाधनों के मामले में नई होने के बावजूद, यह संस्था जिस तरह से स्थापित एनजीओ को चुनौती दे रही है, वह किसी चतुर शतरंज की बिसात जैसा प्रतीत होता है।
Kumar Abhishek NGO : सबसे ज्यादा चर्चा में कुमार अभिषेख एनजीओ
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चर्चा कुमार अभिषेख के नेतृत्व वाले इस कथित एनजीओ और उसके तथाकथित जादुई दस्तावेजों की हो रही है। आम तौर पर एनजीओ का मूल्यांकन उनके वर्षों के अनुभव, तकनीकी क्षमता और धरातल पर मौजूद संसाधनों के आधार पर किया जाता है। लेकिन, इन मानदंडों से इतर, आरोप यह है कि इस एनजीओ के पास बुनियादी संसाधन तक नहीं है, बावजूद इसके नगर निकायों में इसका दबदबा बढ़ता जा रहा है।
इसके ‘कार्य मॉडल’ का विस्तार अब बिहिया नगर पंचायत तक
इसके कार्यशैली को एक चतुर खेल के रूप में देखा जा रहा है। धरातल पर सफाई और अन्य व्यवस्था पूर्व के भाति नगर निकाय द्वारा ही किया जाता है। जबकि फाइलों और रिपोर्टों में उसका पूरा श्रेय और प्रबंधन इस एनजीओ के खाते में दर्ज कर दिया जाता है। इसके ‘कार्य मॉडल’ का विस्तार अब बिहिया नगर पंचायत तक पहुँचता दिख रहा है।




