Homeधर्मपर्व त्योहारइस वर्ष मकर संक्रांति पर 11 साल बाद बना दुर्लभ महासंयोग

इस वर्ष मकर संक्रांति पर 11 साल बाद बना दुर्लभ महासंयोग

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति सनातन संस्कृति का अत्यंत पावन और बहुआयामी शुभ पर्व है, जो प्रत्येक वर्ष सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह खगोलीय घटना मात्र एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, दान-पुण्य और नव-ऊर्जा के संचार का प्रतीक है, जो शीत ऋतु के अंत और वसंत के आगमन का संकेत देता है।

jay kumar

धार्मिक एवं खगोलीय महत्व

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि सूर्य उत्तरी गोलार्ध की ओर अपनी गति बढ़ाते हैं। हिंदू धर्म में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन माना जाता है और इसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी समझा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान करने और सूर्य देव की उपासना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का शमन होता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण के शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा की थी, जो इस पर्व की दिव्यता को और पुष्ट करता है। यह दिन दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व रखता है, जिसमें तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और धन का दान प्रमुख है।

मकर संक्रांति पूरे भारत में विभिन्न रूपों और नामों से मनाई जाती है:

  • उत्तर भारत: इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, तिल-गुड़ का सेवन और दान का विशेष महत्व है। कई स्थानों पर पतंग उड़ाने की परंपरा भी है, जो आसमान में उत्सव का रंग भर देती है।
  • पंजाब और हरियाणा: यह पर्व लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है, जिसमें अग्नि जलाकर उसकी परिक्रमा की जाती है।
  • तमिलनाडु: यहाँ यह पोंगल के रूप में चार दिनों तक चलने वाला एक प्रमुख फसल उत्सव है, जिसमें सूर्य देव और इंद्र देव की पूजा की जाती है।
  • असम: बिहू के नाम से मनाए जाने वाले इस पर्व में सामूहिक भोज और पारंपरिक नृत्य का आयोजन होता है।
  • गुजरात और राजस्थान: इन राज्यों में भी पतंग उत्सव की धूम रहती है, जो मकर संक्रांति का एक अभिन्न अंग बन गया है।

Makar Sankranti 2026: 11 साल बाद बना दुर्लभ महासंयोग

इस वर्ष 2026 की मकर संक्रांति विशेष है। 14 जनवरी को 11 वर्षों के बाद मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का महासंयोग बन रहा है। पंडित सज्जन पांडेय के अनुसार, इससे पहले यह दुर्लभ योग 2015 में बना था। पुण्यकाल : दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक। एकादशी तिथि: 13 जनवरी दोपहर 3:17 बजे से 14 जनवरी शाम 5:52 बजे तक। 15 जनवरी को पूरे दिन स्नान का पुण्यकाल रहेगा।

Bijay singh
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