Pawan Singh meets CM: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास पर पवन सिंह ने मुलाकात की। करीब 30 मिनट तक चली इस भेंट में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई।
- हाइलाइट: Pawan Singh meets CM
- बिहार की राजनीति में पवन सिंह का उदय:
- विधान परिषद से राजनीतक सफर की नई शुरुआत
पटना। बिहार की सियासी गलियारों में इन दिनों भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह के नाम की चर्चा जोरों पर है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जो गाना ‘जोड़ी मोदी आ नीतीश जी के हिट हो गईल’ हर घर की गूंज बन गया था, उसी गीत ने पवन सिंह को जनता के साथ-साथ भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के करीब भी ला खड़ा किया है। मंच से पवन सिंह का वह अंदाज, जब वे भाजपा के पक्ष में गमछा लहराकर इस गाने को गाते थे, आज भी लोगों की यादों में ताजा है। अब इसी निष्ठा का प्रतिफल उन्हें पार्टी की ओर से मिला है। पवन सिंह अब भाजपा कोटे से बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं।
Pawan Singh meets CM : गदगद होकर सीएम से मिले पवन सिंह
पवन सिंह ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए शनिवार को उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की। करीब 30 मिनट तक चली इस भेंट में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद पवन सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि वे 8 जून को विधान परिषद चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, वे उसे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निभाने का हर संभव प्रयास करेंगे।
भाजपा को अपनी ‘मां’ समान बताने वाले पवन सिंह का राजनीतिक सफर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात से पहले पवन सिंह ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी भेंट की। इस दौरान उन्होंने भाजपा को अपनी ‘मां’ समान बताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें जो सम्मान और दायित्व सौंपा है, उसके लिए वे सदैव ऋणी रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में उनका मुख्य उद्देश्य जनसेवा है और वे बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए तत्पर हैं।
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार से एक राजनेता तक
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार से एक राजनेता तक का उनका सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 5 जनवरी 1986 को भोजपुर (आरा) जिले में जन्मे पवन सिंह ने 90 के दशक में अपने चाचा अजीत सिंह के मार्गदर्शन में संगीत की दुनिया में कदम रखा था। वर्ष 2008 में आया उनका सदाबहार गीत ‘लॉलीपॉप लागेलु’ न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय हुआ, जिसने उन्हें ‘पावर स्टार’ की पहचान दी। हालांकि, राजनीति में उनकी राह सीधी नहीं रही। उन्होंने आसनसोल से टिकट मिलने के बाद पीछे हटने और फिर काराकाट से चुनाव लड़ने जैसे निर्णयों से चर्चा बटोरी थी। लेकिन अंततः पार्टी के साथ सामंजस्य बिठाकर उन्होंने अपनी निष्ठा सिद्ध की और आज वे एनडीए के एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
एनडीए की स्थिति बेहद मजबूत
बिहार विधान परिषद की आगामी सीटों के लिए एनडीए ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। भाजपा ने अपने कोटे से पवन सिंह के साथ-साथ संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित को मैदान में उतारा है। वहीं, जदयू ने निशांत कुमार, भारती मेहता और शिवरानी देवी प्रजापति पर भरोसा जताया है, जबकि उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद का नाम घोषित किया गया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को प्रत्याशी बनाया है।
पवन सिंह के राजनीतिक भविष्य का एक नया अध्याय शुरू
मौजूदा विधानसभा के गणित को देखते हुए एनडीए की स्थिति बेहद मजबूत नजर आती है। गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल उपलब्ध है, जिसके कारण सभी एनडीए उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। 8 जून को होने वाले नामांकन और उसके बाद की चुनावी प्रक्रिया पर अब पूरे बिहार की निगाहें टिकी हुई हैं, जहाँ से पवन सिंह के राजनीतिक भविष्य का एक नया अध्याय शुरू होगा।

