RK Singh said: आरा के पूर्व सांसद आरके सिंह ने इस घटना को लेकर कहा: ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाली पार्टी को इस मामले में निष्पक्षता दिखानी चाहिए।
- हाइलाइट: RK Singh said
- पूर्व सांसद आरके सिंह ने कहा भरत तिवारी हत्याकांड का सच फेसबुक लाइव रिकॉर्ड है
- उनके शरीर पर पांच गोलियों के निशान, पुलिस बर्बरता और निर्मम हत्या के प्रमाण हैं
आरा। भोजपुर जिला के शाहपुर (बिलौटी) में घटित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर में दुखद मौत का मामला पूरे राज्य व देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरा के पूर्व सांसद आरके सिंह ने इस घटना को पुलिस प्रशासन की घोर बर्बरता और न्याय प्रक्रिया का उल्लंघन करार दिया है। उनके अनुसार, 17 जून को घटित यह पूरी घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए स्तब्ध करने वाली है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
RK Singh said : भरत ने हथियार फेंक कर आत्मसमर्पण कर दिया था
पूर्व सांसद ने बताया कि भरत तिवारी एक समाज सेवी नौजवान थे, जो जवइनिया के विस्थापित गरीबों के पुनर्वास और उनके हकों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। फेसबुक लाइव पर रिकॉर्ड किए गए साक्ष्यों के अनुसार, भरत तिवारी ने पुलिस प्रशासन के आग्रह पर अपना हथियार फेंक कर आत्मसमर्पण कर दिया था। उस समय पुलिस ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि आरोपी ने हथियार सौंप दिया है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस कस्टडी में निर्मम हत्या की गई
आरके सिंह के मुताबिक, एसपी और राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि भरत तिवारी पुलिस की कस्टडी में थे, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद उनके परिजनों को उनकी हत्या की सूचना मिली। शरीर पर पांच गोलियों के निशान इस बात का प्रमाण हैं कि पुलिस की हिरासत में रहते हुए उनकी निर्मम हत्या की गई।
सीबीआई जांच की पुरजोर मांग : पूर्व सांसद ने इस पूरे मामले में सीबीआई जांच की पुरजोर मांग की है। हालांकि राज्य सरकार द्वारा न्यायिक जांच का निर्णय सराहनीय है, लेकिन उनका तर्क है कि जिस पुलिस पर हत्या का आरोप है, यदि वही विभाग जांच करेगा तो न्याय की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं हो पाएगी। सीबीआई जांच की मांग न केवल पीड़ित परिवार की है, बल्कि यह आम जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए भी आवश्यक है।
पुलिसिया दमन और बर्बरता का मामला
इस गंभीर मुद्दे पर हो रही जातिगत राजनीति को लेकर आरके सिंह ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक नौजवान की मौत पर जाति-पाति की राजनीति करना न केवल निंदनीय है, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की संवेदनहीनता को भी दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई ‘फॉरवर्ड’ या ‘बैकवर्ड’ का मामला नहीं है, बल्कि पुलिसिया दमन और बर्बरता का मामला है, जिसका शिकार कोई भी हो सकता है। यदि आज पुलिस की इस बेलगाम शक्ति पर प्रश्न नहीं उठाया गया, तो कल किसी भी सामान्य नागरिक या उनके बच्चों के साथ ऐसी अनहोनी हो सकती है।
न्याय की मांग कोई व्यक्तिगत नहीं: पूर्व सांसद ने सत्ताधारी दल को उनकी जिम्मेदारी का स्मरण कराते हुए कहा कि राजनीति का स्तर इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए कि हत्या जैसे संवेदनशील मामलों में भी समाज को बांटने का प्रयास किया जाए। ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाली पार्टी को इस मामले में निष्पक्षता दिखानी चाहिए। यह समय जाति की राजनीति से ऊपर उठकर मृतक को न्याय दिलाने और पुलिस तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने का है। न्याय की मांग कोई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के लिए अनिवार्य शर्त है।

