Shahpur E-tendering: शाहपुर नगर पंचायत में वर्तमान में संचालित हो रहे विभागीय कार्यों की गति और संख्या को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि नए नियमों के पूर्ण क्रियान्वयन से पूर्व ही पुरानी व्यवस्था के तहत अधिकतम योजनाओं को निपटाने की जल्दबाजी की जा रही है।
- हाइलाइट: Shahpur E-tendering – ई-निविदा की अनिवार्यता पर उठते सवाल
- शाहपुर नगर में विभागीय स्तर पर कराए जाने वाले कार्यों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि
आरा। बिहार के नगर निकायों में विकास योजनाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने हाल ही में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा 25 फरवरी 2026 को जारी किए गए एक महत्वपूर्ण पत्र के माध्यम से सभी नगर निकायों में विकास कार्यों के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में आमूल-चूल परिवर्तन किया गया है। इस नए आदेश के तहत अब 15 लाख रुपये से कम लागत वाली योजनाओं का निष्पादन विभागीय स्तर पर करने पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है। विभाग ने इस संबंध में पूर्व में जारी सभी आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए ई-निविदा (e-tendering) को अनिवार्य बना दिया है।
हालांकि, राज्य सरकार के इस सख्त रुख के बावजूद शाहपुर नगर पंचायत में एक विरोधाभासी स्थिति देखने को मिल रही है। सरकारी निर्देश जारी होने के बाद, जहाँ प्रशासनिक स्तर पर ई-निविदा की प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाना चाहिए था, वहीं इसके विपरीत यहाँ विभागीय स्तर पर कराए जाने वाले कार्यों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। विभागीय कार्यों की इस ‘बाढ़’ ने न केवल सरकार के आदेशों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि स्थानीय नपं प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है।
नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देशानुसार, अब छोटी से छोटी योजनाओं के लिए भी निविदा प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना और सरकारी धन के सदुपयोग को बढ़ावा देना है। पूर्व की व्यवस्था में विभागीय स्तर पर कार्य कराए जाने की छूट का अक्सर दुरुपयोग होने की शिकायतें मिलती रहती थीं, जिसे देखते हुए ही सरकार ने पुराने आदेश को निरस्त कर नई व्यवस्था लागू की है।
शाहपुर नगर पंचायत में वर्तमान में संचालित हो रहे विभागीय कार्यों की गति और संख्या को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि नए नियमों के पूर्ण क्रियान्वयन से पूर्व ही पुरानी व्यवस्था के तहत अधिकतम योजनाओं को निपटाने की जल्दबाजी की जा रही है। यह स्थिति न केवल वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि राज्य सरकार के केंद्रीकृत निगरानी तंत्र को भी चुनौती देती है।
इधर, शाहपुर नपं के पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा की यदि इन कार्यों में नियमों की अनदेखी जारी रहती है, तो यह भविष्य में वित्तीय अनियमितताओं और जांच का विषय बन सकता है। स्थानीय नागरिकों और संबंधित पक्षों के बीच यह चर्चा का विषय है कि जब राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से विभागीय कार्यों पर रोक लगा दी है, तो शाहपुर नगर पंचायत में किस आधार पर इन योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है।


