Shahpur Thana Encounter: आरा में गुरुवार को तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने न्यायिक आयोग के समक्ष घटनाक्रम का विस्तारपूर्वक विवरण प्रस्तुत किया।
- हाइलाइट: Shahpur Thana Encounter
- अधिकारियों ने 16 जून से लेकर एनकाउंटर के दिन तक की पूरी घटना की विस्तृत जानकारी दी।
आरा। भोजपुर के बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच तेजी से आगे बढ़ते हुए अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है। पीड़ित पक्ष की गवाही पूरी होने के उपरांत, अब पुलिस पक्ष की ओर से गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस क्रम में गुरुवार को तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने न्यायिक आयोग के समक्ष घटनाक्रम का विस्तारपूर्वक विवरण प्रस्तुत किया।
आयोग के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, केस के आईओ इंस्पेक्टर संजीव कुमार और एसटीएफ के एक अवर निरीक्षक ने अपना पक्ष रखा। इन अधिकारियों ने 16 जून से लेकर एनकाउंटर के दिन तक की पूरी घटना की विस्तृत जानकारी दी।
Shahpur Thana Encounter : पुलिस ने बताया वह आत्मसमर्पण नाटक था
पुलिस अधिकारियों द्वारा आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम अवैध हथियार और फायरिंग की शिकायत के आधार पर भरत भूषण तिवारी के आवास पर पहुंची थी। 17 जून की सुबह जब पुलिस ने उसे घेरा, तो स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थी। अधिकारियों के बयानों में उल्लेख किया गया है कि भरत भूषण लगातार पुलिस को छकाता रहा। वह आत्मसमर्पण का नाटक करते हुए अपनी पिस्टल कुछ दूरी पर फेंक देता था, लेकिन जैसे ही पुलिस उसे जब्त करने के लिए आगे बढ़ती, वह फुर्ती से पिस्टल उठाकर पुनः फायरिंग शुरू कर देता था।
आत्मरक्षा में पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी
बयान में यह भी कहा गया है कि वह एक हाथ में मोबाइल और दूसरे में पिस्टल थामे पुलिस को लगातार ललकार रहा था और अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। उसकी ओर से की जा रही अंधाधुंध फायरिंग से आसपास के नागरिकों की सुरक्षा को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। काफी मशक्कत के बाद जब उसे सरेंडर के लिए मनाया गया और उसने हथियार फेंक दिया, तो पुलिस की एक टीम उसे कब्जे में लेने के लिए आगे बढ़ी। इसी बीच उसने पुनः पिस्टल उठाकर पुलिस दल पर दो राउंड फायरिंग कर दी। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि अचानक हुए इस जानलेवा हमले के बाद, आत्मरक्षा में ही पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें भरत भूषण तिवारी को गोली लगी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
शेष पुलिस अधिकारियों और जवानों के बयान आज दर्ज किए जाएंगे
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायिक आयोग ने प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखा है। इस प्रकरण से जुड़े शेष पुलिस अधिकारियों और जवानों के बयान शुक्रवार को दर्ज किए जाएंगे। आयोग अब दोनों पक्षों के बयानों का मिलान कर मामले के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करेगा, ताकि सत्यता का पता लगाया जा सके। न्यायिक प्रक्रिया के तहत इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा रही है, जिस पर संबंधित पक्षों, मीडिया और लोगों की पैनी नजर बनी हुई है।

