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भरत तिवारी क्यों मारे गए? न्याय की इस युवा आवाज को क्यों दबा दी गई?

Bharat Tiwari: भरत तिवारी भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार, उनका संघर्ष और व्यवस्था परिवर्तन का उनका सपना हमेशा जीवित रहेगा।”

  • हाइलाइट: Bharat Tiwari
  • भरत तिवारी की आवाज को दबाने वाले यह भूल गए कि
    एक आवाज के दबने से हजारों नई आवाजें पैदा होती हैं

खबरे आपकी। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में हुई पुलिस एनकाउंटर की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। “आज भरत तिवारी हमारे बीच नहीं रहे। उनके हत्यारों को सजा दिलाने के लिए धरना, जुलूस और प्रदर्शन हो रहे हैं, यह जरूरी भी है। लेकिन एक सवाल यह भी है कि भरत तिवारी क्यों मारे गए? इस पर उतनी चर्चा नहीं हो रही, जितनी होनी चाहिए। भरत तिवारी का हमसे दूर हो जाना न केवल उनके परिवार के लिए एक व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि यह उस हर उस व्यक्ति के लिए एक बड़ा झटका है जो समाज में बदलाव की उम्मीद रखते हैं।

Bharat Tiwari ने न्याय की प्रक्रिया में व्याप्त कमियों को बेबाकी से उजागर किया

बिलौटी गांव के इस पूरे घटनाक्रम में एक कड़वा सच यह भी है कि जिस विषय पर सबसे अधिक विमर्श होना चाहिए था, वह कहीं पीछे छूट गया है। भरत तिवारी की हत्या क्यों हुई? उन्होंने ऐसा क्या किया था कि उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी? ये प्रश्न आज भी प्रासंगिक हैं। भरत तिवारी ने उस भ्रष्ट और जर्जर होती व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई थी, जो आम आदमी के अधिकारों का हनन करती है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी और न्याय की प्रक्रिया में व्याप्त कमियों को बेबाकी से उजागर किया।

क्या हम वास्तव में उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं या केवल औपचारिकता निभा रहे हैं?

सच को सामने लाने की उनकी हिम्मत ने उन ताकतों को चुनौती दी, जो समाज में पारदर्शिता के बजाय अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती हैं। आज हमें खुद से यह पूछने की आवश्यकता है कि क्या हम वास्तव में उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं या केवल औपचारिकता निभा रहे हैं? दुख इस बात का है कि भरत तिवारी की शहादत का उपयोग सियासी लोग और उनकी पार्टी अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए कर रहे हैं। उनके आदर्शों और उनके द्वारा शुरू किए गए संघर्ष को आगे बढ़ाने के बजाय, उनकी मृत्यु को केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

किसी व्यक्ति को समाप्त किया जा सकता है, लेकिन उसके विचारों को नहीं।

भरत तिवारी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है जब हम केवल उनकी हत्या पर आक्रोशित होने तक सीमित न रहें, बल्कि उन मुद्दों को हाथ में लें जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया था। व्यवस्था में सुधार, प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक न्याय की जो अलख उन्होंने जगाई थी, उसे अब हमें मिलकर जलाए रखना होगा।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति को भौतिक रूप से समाप्त किया जा सकता है, लेकिन उसके विचारों को दबाना असंभव है। भरत तिवारी ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जहां कानून का शासन हो और आम इंसान की आवाज अनसुनी न रह जाए। उस सपने को हकीकत में बदलना अब हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

भरत तिवारी का संकल्प सदैव जीवित रहे, यही सच्ची श्रद्धांजलि

आज का समय शोक मनाने के साथ-साथ आत्मचिंतन का भी है। यदि हम चाहते हैं कि भविष्य में किसी और भरत तिवारी को अपनी जान की कीमत पर सच न बोलना पड़े, तो हमें उस व्यवस्था को बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। उनकी आवाज को दबाने की कोशिश करने वाले यह भूल गए कि एक आवाज के दबने से हजारों नई आवाजें पैदा होती हैं। भरत तिवारी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, उनके विचार और व्यवस्था परिवर्तन का उनका संकल्प सदैव जीवित रहेगा। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

RAVI KUMAR
RAVI KUMAR
बिहार के भोजपुर जिला निवासी रवि कुमार एक भारतीय पत्रकार है एवं न्यूज पोर्टल खबरे आपकी के प्रमुख लोगों में से एक है।

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