Who is SDM Sanjeet Kumar: बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी निवासी भरत तिवारी के परिवार का स्पष्ट आरोप है कि इस पूरी घटना के मुख्य सूत्रधार एसडीएम ही हैं
- हाइलाइट: Who is SDM Sanjeet Kumar
- वकील सौरभ तिवारी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एसडीएमके खिलाफ मांग उठाई है
आरा। भोजपुर जिले का भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार सहित देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस घटना के बाद पुलिस के साथ जिला प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और चर्चाओं का दौर जारी है। भरत तिवारी ने अपनी मौत से ठीक पहले फेसबुक लाइव और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जगदीशपुर के एसडीएम संजीत कुमार पर जवइनियां गांव के बाढ़ विस्थापितों के पुनर्वास फंड में बड़े पैमाने पर हेरफेर करने के आरोप लगाए थे।
परिवार का स्पष्ट आरोप है कि इस पूरी घटना के मुख्य सूत्रधार एसडीएम ही हैं, जिन्होंने कथित तौर पर भरत तिवारी को अपने दफ्तर से धक्के मारकर बाहर निकाला था और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस विवाद के बीच, सीनियर वकील सौरभ तिवारी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एसडीएम को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग उठाई है।
Who is SDM Sanjeet Kumar : कौन हैं एसडीएम संजीत कुमार?
मधेपुरा जिले के गम्हरिया गांव के निवासी संजीत कुमार ने अपनी मेहनत के दम पर बीपीएससी 60वीं-62वीं परीक्षा में सफलता हासिल की थी। 60वीं रैंक प्राप्त करने वाले संजीत ने फरवरी 2019 में डिप्टी कलेक्टर के तौर पर बेगूसराय से अपने करियर की शुरुआत की थी। भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद से जगदीशपुर एसडीएम दफ्तर में हलचल कम हो गई है और उन्होंने आम लोगों से मिलना-जुलना काफी सीमित कर दिया है।
जगदीशपुर एसडीएम पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
भरत तिवारी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बिलौटी गांव में विस्थापितों के पुनर्वास के लिए आए फंड में भारी अनियमितताओं का जिक्र किया था। उनके अनुसार, इस कार्य के लिए पहले 11 करोड़ और बाद में 1400 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था, जिसमें वित्तीय धांधली की गई। भरत ने हैंडपंप लगाने के काम में भी लापरवाही का मुद्दा उठाया था। उनके भाई चंदन का दावा है कि सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो में भरत ने एसडीएम पर उन्हें और उनके परिवार को मरवाने की धमकी देने का आरोप लगाया था। कथित तौर पर जब भरत भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर एसडीएम ऑफिस गए, तो उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।
सबूत मिटाने की आशंका और मोबाइल डेटा
घटना के बाद बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत ने एसडीएम को इस पूरे प्रकरण का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। महापंचायत के संयोजक पंकज त्रिपाठी का तर्क है कि घोटाले से जुड़े पुख्ता सबूत और कॉल रिकॉर्ड्स भरत के मोबाइल में मौजूद थे। चूंकि अब यह मोबाइल पुलिस के कब्जे में है, इसलिए स्थानीय लोगों और परिजनों के मन में यह गहरी आशंका है कि मामले की सच्चाई छुपाने के लिए मोबाइल डेटा के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।
एनकाउंटर के वक्त एसडीएम की मौजूदगी पर उठते सवाल
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू मौका-ए-वारदात पर एसडीएम संजीत कुमार की मौजूदगी है। परिजनों ने इसे सोची-समझी साजिश बताया है। राज्य के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि एक सामान्य पुलिस ऑपरेशन में एसडीएम की वहां उपस्थिति समझ से परे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्यतः लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति में मजिस्ट्रेट की जरूरत होती है, लेकिन एक व्यक्ति को पकड़ने की कार्रवाई में प्रशासनिक अधिकारी का वहां होना संदेह पैदा करता है। फिलहाल, यह मामला कानूनी और प्रशासनिक जांच के बीच एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बनकर खड़ा है।




