Sand art Bharat: वाराणसी से आए सैंड आर्टिस्ट रूपेश कुमार ने रेत पर अपनी कला के जरिए भरत भूषण तिवारी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है।
- हाइलाइट: Sand art Bharat
- कला और संवेदना का अनूठा संगम
- सैंड आर्ट के जरिए भरत भूषण तिवारी को अनोखी श्रद्धांजलि
आरा। बिहार के भोजपुर जिले में शाहपुर की घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। शाहपुर पुलिस एनकाउंटर में बिलौटी गांव के निवासी भरत भूषण तिवारी की मृत्यु के बाद उनके परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा शोक है। इस बीच, उन्हें याद करने और अपनी संवेदनाएं प्रकट करने का एक बेहद अनूठा और कलात्मक तरीका सामने आया है। वाराणसी से आए सैंड आर्टिस्ट रूपेश कुमार ने रेत पर अपनी कला के जरिए भरत भूषण तिवारी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है।
Sand art Bharat : रेत पर बनी यह तस्वीर इतनी जीवंत
रूपेश कुमार ने सफेद बालू का उपयोग करते हुए बहुत ही बारीकी और कुशलता से भरत भूषण तिवारी की आकृति उकेरी है। सैंड आर्ट यानी रेत पर चित्रकारी करना अपने आप में धैर्य और बारीकी का काम है, लेकिन रूपेश ने जिस तरह से इस कलाकृति को आकार दिया, वह काबिल-ए-तारीफ है। रेत पर बनी यह तस्वीर इतनी जीवंत और आकर्षक लग रही थी कि इसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया।
इस अनूठी श्रद्धांजलि को देखने के लिए केवल बिलौटी गांव के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से भी काफी संख्या में लोग पहुंचे। दिनभर वहां लोगों की भीड़ लगी रही, जो इस कलाकृति को निहारते और कलाकार की प्रशंसा करते नजर आए। अपनी इस प्रस्तुति के बारे में बात करते हुए सैंड आर्टिस्ट रूपेश कुमार ने बताया कि यह कलाकृति उन्होंने भरत भूषण तिवारी की स्मृति को समर्पित की है। उनका उद्देश्य कला के माध्यम से दिवंगत आत्मा को सम्मान देना और लोगों के बीच एक भावनात्मक संदेश पहुंचाना था।
सोशल मीडिया पर इस कलाकृति की तस्वीरें काफी साझा की जा रही हैं
लोगों ने इस पहल को बेहद सराहनीय बताया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि श्रद्धांजलि देने के तो कई तरीके होते हैं, लेकिन किसी कलाकार द्वारा इतनी मेहनत और शिद्दत से रेत पर आकृति बनाकर याद करना वास्तव में दिल को छू लेने वाला है। सोशल मीडिया पर भी इस कलाकृति की तस्वीरें काफी साझा की जा रही हैं, जहाँ लोग इसे एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि मान रहे हैं।
कला में वह शक्ति होती है जो शब्दों से परे जाकर भावनाओं को व्यक्त कर सकती है। सैंड आर्टिस्ट रूपेश कुमार की यह कोशिश दिखाती है कि कैसे एक कलाकार अपनी कला का उपयोग करके समाज के दुख में भागीदार बन सकता है। भरत भूषण तिवारी के प्रति लोगों का यह जुड़ाव और उनके प्रति सम्मान का भाव इस बात का प्रतीक है कि वे अपने क्षेत्र के लोगों के दिलों में एक खास जगह रखते थे।




