Bhuar Ojha : ठेकेदार द्वारा लगाए गए आरोपों और जान से मारने की धमकी के दावों के बीच, भाजपा नेता मुक्तेश्वर ओझा उर्फ भुअर ओझा ने अपना पक्ष रखते हुए पूरी घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण दिया है।
- हाइलाइट: Bhuar Ojha
- जवैनिया गंगा कटाव रोधी कार्यों का निरीक्षण और हालिया विवाद:
आरा,भोजपुर। जिले के शाहपुर प्रखंड के जवैनिया में गंगा कटाव रोधी कार्य के निरीक्षण के दौरान उपजे विवाद ने क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो और भाजपा नेता मुक्तेश्वर ओझा उर्फ भुअर ओझा के खिलाफ दर्ज कराए गए मामले के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। ठेकेदार द्वारा लगाए गए आरोपों और जान से मारने की धमकी के दावों के बीच, मुक्तेश्वर ओझा ने अपना पक्ष रखते हुए पूरी घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण दिया है।
प्रशासनिक सूचना के साथ निरीक्षण की शुरुआत: भाजपा नेता मुक्तेश्वर ओझा ने स्पष्ट किया कि जवाइनिया में उनका जाना कोई आकस्मिक दौरा नहीं था, बल्कि यह पूर्व-सूचित प्रक्रिया थी। उन्होंने बताया कि निरीक्षण से पहले कार्यपालक अभियंता को सूचित किया था। इसके अलावा, जिला पदाधिकारी महोदय को भी विधिवत रूप से सूचित किया गया था कि वे पार्टी पदाधिकारियों और कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ कार्यस्थल का निरीक्षण करने जा रहे हैं। श्री ओझा का कहना है कि उन्होंने जो भी किया, वह पूरी तरह से नियमानुसार और सार्वजनिक जवाबदेही के तहत किया।
Bhuar Ojha : कार्य में बरती गई अनियमितताओं का खुलासा
भाजपा नेता Bhuar Ojha ने निरीक्षण के दौरान पाई गई गंभीर खामियों को रेखांकित करते हुए बताया कि उन्होंने पहले ही विभाग से बीओक्यू (BOQ) की मांग की थी और कार्यपालक अभियंता द्वारा भेजे गए दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया था। निरीक्षण के दौरान उन्हें कई ऐसी अनियमितताएं मिलीं, जो सरकारी मानकों के सरासर खिलाफ थीं:
१. सिटीजन बोर्ड का अभाव: सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी छोटे या बड़े कार्य को शुरू करने से पहले वहां एक सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है। इस बोर्ड पर कार्यकारी एजेंसी का नाम, परियोजना की लागत, कार्य शुरू होने और समाप्त होने की तिथि का विवरण होना चाहिए। ओझा के अनुसार, वहां ऐसा कोई बोर्ड मौजूद नहीं था। जब उन्होंने इस बारे में सवाल किया, तो मौके पर मौजूद लोगों ने टालमटोल करते हुए कहा कि बोर्ड पलानी में रखा है। यह स्पष्ट दर्शाता है कि काम में पारदर्शिता का घोर अभाव था।
२. सामग्री की गुणवत्ता में धांधली: बीओक्यू के प्रावधानों के अनुसार, बैग में भरने के लिए गंगा नदी की ऊपरी सतह की शुद्ध बालू का उपयोग किया जाना था, जिसे आधा से एक किलोमीटर दूर से ढोकर (कैरिज) लाना था। प्रक्रिया के तहत खाली बैग में बालू भरने के बाद उसे मशीन से नायलॉन धागे द्वारा डबल सिलाई करना था और फिर नायलॉन क्रेट में व्यवस्थित करना था। इसके विपरीत, वहां मौके पर मौजूद वीडियो सबूत बताते हैं कि ठेकेदार ने वहीं आसपास से खुदाई करके मिट्टी और बालू का मिश्रण बैगों में भर दिया।
३. विभाग की संलिप्तता का आरोप: ओझा ने जब इस निम्न स्तरीय कार्य को देखकर ठेकेदारों से पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दिया। ठेकेदारों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें विभाग के लोगों ने ही स्थानीय स्तर पर मिट्टी और बालू भरकर काम निपटाने का निर्देश दिया है। यह एक गंभीर मुद्दा है जो विभाग और ठेकेदार की सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
FIR और आरोपों पर भाजपा नेता का रुख
ठेकेदार द्वारा दर्ज कराए गए केस और जान से मारने की धमकी जैसे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुक्तेश्वर ओझा (Bhuar Ojha) ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद और अपना मुंह बंद कराने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार को बेनकाब करता है और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकता है, तो ऐसे हथकंडे अपनाए जाते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनका एकमात्र उद्देश्य सरकारी राशि का सही उपयोग और कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था।
ठेकेदार के आरोपों की वास्तविकता: भुअर ओझा का कहना है कि ठेकेदार द्वारा जो वीडियो वायरल किया जा रहा है, वह सच्चाई का केवल एक हिस्सा है जिसे गलत तरीके से पेश किया गया है। असल में, विवाद की जड़ ठेकेदार द्वारा निजी कृषि भूमि पर बिना अनुमति के बोल्डर गिराना था। ग्रामीणों का यह स्पष्ट कहना था कि उनकी उपजाऊ जमीन पर बोल्डर और डस्ट गिरने से खेती योग्य भूमि नष्ट हो रही है। ग्रामीणों ने केवल अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी और कार्यपालक अभियंता से भी इस बाबत शिकायत की थी, जिन्होंने जल्द ही बोल्डर हटवाने का आश्वासन भी दिया था।
लूट के दावों पर उठे सवाल: ठेकेदार द्वारा 5 लाख 85 हजार रुपये की लूट का जो एफआईआर दर्ज कराया गया है, वह अपने आप में विरोधाभासी है। भुअर ओझा ने तार्किक प्रश्न उठाते हुए कहा कि यदि ठेकेदार एक तरफ मारपीट और धक्का-मुक्की का शिकार हो रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ उसके पास सुरक्षित कैंप में रखे बैग से इतनी बड़ी राशि कैसे चोरी हो सकती है? यह दोनों बातें एक साथ संभव नहीं हैं। इतने महत्वपूर्ण स्थान पर रखी गई धनराशि की सुरक्षा व्यवस्था न होना और फिर अचानक हुई इस तथाकथित लूट की कहानी, केस में फसाने की इस साजिश को सभी लोग समझ रहे है।
स्थानीय राजनीति और एफआईआर का खेल: इस प्रकरण में नामजद एफआईआर को लेकर भुअर ओझा (Bhuar Ojha) ने स्थानीय राजनीति पर भी तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार के सगे-संबंधियों और स्थानीय स्तर पर स्वार्थ सिद्धि करने वाले कुछ लोगों ने मिलीभगत करके निर्दोष लोगों को इस मामले में फंसाया है। ओझा का दावा है कि एफआईआर में शामिल बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें ठेकेदार व्यक्तिगत रूप से नहीं पहचानता, फिर भी उनके नाम एफआईआर में दर्ज करवा दिए गए। यह राजनीतिक रंजिश का खेल है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: भुअर ओझा ने शाहपुर वासियों को आश्वस्त किया है कि वे किसी भी गलत कार्य को नहीं होने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और सरकार की नीति स्पष्ट है—जीरो टॉलरेंस। जो ठेकेदार स्वयं नियम विरुद्ध कार्य कर रहे हैं, वे अब मीडिया कर्मियों को भी डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। यदि उनका कार्य सही है, तो उन्हें वीडियो बनाने वालों से डरने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनकी घबराहट यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं वे अनैतिक कार्यों में संलिप्त हैं।
लूट-खसोट या गलत प्रथा को पनपने नहीं देंगे: भुअर ओझा
भुअर ओझा ने दोहराया कि वे जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और जवईनीया में किसी भी प्रकार की लूट-खसोट या गलत प्रथा को पनपने नहीं देंगे। जो गड़बड़ियां हमको दिखाई दी वहां जाने पर। इसकी लिखित सूचना और बीओक्यू के विपरीत जो जो काम वहां कराया जा रहा है, उसकी भी लिखित सूचना जिला अधिकारी से लेकर मुख्य सचिव तक और मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री जी तक हम लोगों ने शिकायत दर्ज करा दी है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होगी। अगर ठेकेदार गलत है, तो इस पर कार्रवाई भी होगी।

